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सोनिया ने कहा, सोशल मीडिया के साथ जनता से सीधा संपर्क है जरूरी

सोनिया बना रही है नई रणनीति
सोनिया बना रही है नई रणनीति

सोनिया ने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ ही सड़क पर उतरकर संघर्ष करें

  • भाषा
  • Last Updated: September 12, 2019, 6:35 PM IST
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नयी दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने अर्थव्यवस्था की स्थिति और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर गुरुवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. सोनिया ने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ ही सड़क पर उतरकर संघर्ष करें तथा जनता से सीधा संपर्क स्थापित करें.

पार्टी के महासचिवों-प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्रियों और विधायक दल के नेताओं की बैठक में सोनिया ने देश की अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात पर चिंता जताई. उन्होंने यह आरोप लगाया कि मोदी सरकार सभी संस्थाओं को कमजोर कर रही है और जो लोग विरोध कर रहे हैं उनकी आवाज को दबाया जा रहा है. उन्होंने कहा हम ऐसे वक्त मिल रहे हैं जब प्रतिशोध की राजनीति अपने चरम पर है और यह वो समय है जब सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकी दी जा रही है.

सोनिया ने दावा किया कि लोकतंत्र को इतना खतरा कभी नहीं रहा जितना आज है. मैंने कुछ हफ्ते पहले भी कहा था कि सत्ता का बहुत ही खतरनाक ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है. देश उन ताकतों का मुकाबले करने को तैयार है जो महात्मा गांधी, सरदार पटेल और बी आर आंबेडकर के संदेशों को गलत तरीके से पेश कर रहा है. हमें इनका मुकाबला करने के लिए सड़कों पर उतरना होगा गांव कस्बों और शहरों में लोगों तक पहुंचना होगा.



कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा सिर्फ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना या इस पर आक्रामक रहने से कुछ नही होने वाला उसकी अपेक्षा सीधे जनता तक पहुंचना ज्यादा महत्वपूर्ण है. हाल ही में कई कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने के संदर्भ में सोनिया ने कहा, लोग समय आने पर अपना रंग दिखा ही देते हैं यह अवसरवादी चरित्र को दर्शाता है. हम जल्द ही तीन राज्यों में चुनावों का सामना करने जा रहे हैं. हालात चुनौतीपूर्ण हैं और अगर हम सिर्फ पार्टी हित को ऊपर रखें तो फिर से अपनी खोई जमीन वापस पा सकते हैं.
सोनिया ने कहा कि पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारों को संवेदनशील जवाबदेह और पारदर्शी शासन की मिसाल पेश करनी होगी तथा घोषणापत्र में किए वादों को पूरा करना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम जनता का विश्वास खो देंगे और परिणाम विपरीत होंगे.

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