अपना शहर चुनें

States

कोविड-19 महामारी ने बढ़ाई चिंताएं, दक्षिण एशिया पर संघर्ष का जोखिम गहराया

पड़ोसी मुल्क चीन के साथ भारत का विवाद अभी तक जारी है. (फोटो: रॉयटर्स)
पड़ोसी मुल्क चीन के साथ भारत का विवाद अभी तक जारी है. (फोटो: रॉयटर्स)

Corona Virus Pandemic: कोविड-19 (Covid-19) के कारण सामने आई आंतरिक चुनौतियों से निपटने के लिए अति राष्‍ट्रवाद का सहारा लेना और अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार को रोकना एक प्रकार का जुनून जैसा है. इससे तनाव और बढ़ेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2021, 7:57 PM IST
  • Share this:


(लेफ्ट जनरल (रिटा) डीएस हूडा)
नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर में स्मरण दिवस को याद करते हुए ब्रिटेन के रक्षा प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल सर निक कार्टर ने एक इंटरव्‍यू में कहा था 'मुझे लगता है कि हम एक ऐसे क्षण में रह रहे हैं जहां दुनिया बहुत अनिश्चित और चिंताओं से भरा हुआ स्थान है. हमारे लिए जो वास्‍तविक जोखिम है, वे क्षेत्रीय संघर्ष ही हैं. ये संघर्ष इस वक्‍त भी जारी हैं. आप देखेंगे कि यही संघर्ष वृद्धि बड़ी गड़बड़ी की ओर जाती है.

यह पूछे जाने पर कि क्या अगले विश्व युद्ध का खतरा था जनरल कार्टर ने जवाब दिया कि 'मैं कह रहा हूं कि यह एक जोखिम है और हमें उन जोखिमों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है.' इस बात पर भी बहुत चर्चा और बहस हो रही है कि विश्व भर में देशों के बीच युद्ध (War) घट रहे हैं. संघर्षों के बारे में गणना की जानकारी उपलब्ध कराने वाला प्रमुख द उपसाला कॉनफ्लिक्ट डाटा प्रोग्राम (UCDP) के अनुसार दूसरे विश्व युद्ध के बाद से राज्‍य आधारित संघर्ष (जहां कम से कम एक संघर्ष दल सरकार है) 2019 में अपने चरम पर थे.




इस जानकारी में 54 राज्‍य आधारित संघर्षों में से मात्र दो ही अंतरराज्यीय थे. इससे कुछ भरोसा जरूर हुआ कि देशों के बीच युद्ध अब कम हो गए हैं. 2017 में रैंड कारपोरेशन ने कॉनफ्लिक्ट ट्रेंड्स एंड कॉनफ्लिक्ट ड्राइवर्स शीर्षक से एक अध्ययन का प्रकाशन किया था. इस इसमें 1946 से 2015 के बीच तक का डाटा उपयोग में लाया था. साथ ही साहित्य समीक्षाओं को भी केंद्र में रखा था ताकि वह संघर्षों के अनुभव और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर ट्रेंड्स की स्थापना कर सके.

(इस आर्टिकल को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज