अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, धरती का सबसे नजदीकी ब्लैक होल खोजा

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, धरती का सबसे नजदीकी ब्लैक होल खोजा
ब्लैकहोल की स्पिन की गति नहीं निकाली जा सकती थी, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसका तरीका निकाल लिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

यह ब्लैक होल धरती से करीब एक हजार प्रकाश वर्ष (Light Years) दूर है. एक प्रकाश वर्ष की दूरी साढ़े नौ हजार अरब किलोमीटर दूरी के बराबर होती है. लेकिन ब्रह्मांड, यहां तक कि आकाशगंगा (Galaxy) के संदर्भ में, यह ब्लैक होल हमारा पड़ोसी है.

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वाशिंगटन. खगोल विज्ञानियों (Astronomers) ने पृथ्वी के अब तक के सबसे नजदीकी ब्लैक होल (Black Hole) का पता लगाया है. यह धरती के इतना नजदीक है कि इसके साथ नृत्य करते दो तारों (Stars) को बिना दूरबीन के देखा जा सकता है.

यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी के खगोलविद थॉमस रिविनिउस ने कहा कि यह ब्लैक होल धरती से करीब एक हजार प्रकाश वर्ष (Light Years) दूर है. एक प्रकाश वर्ष की दूरी साढ़े नौ हजार अरब किलोमीटर दूरी के बराबर होती है. लेकिन ब्रह्मांड, यहां तक कि आकाशगंगा (Galaxy) के संदर्भ में, यह ब्लैक होल हमारा पड़ोसी है.

इससे करीब के ब्लैक होल होने की भी है संभावना: निदेशक
रिविनिउस ने ही इस खोज से जुड़ी टीम का नेतृत्व किया था. इस खगोलीय खोज से संबंधित अध्ययन बुधवार को पत्रिका ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स’ (Astronomy and Astrophysics) में प्रकाशित हुआ.
इससे पहले मिला धरती का नजदीकी ब्लैक होल (Nearest Black Hole) इससे लगभग तीन गुना यानी कि 3,200 वर्ष दूर है. हार्वर्ड ब्लैक होल इनीशिएटिव के निदेशक एवी लोएब ने कहा कि ऐसे ब्लैक होल होने की भी संभावना है जो इस ब्लैक होल की तुलना में धरती के अधिक करीब हों.



क्या होता है ब्लैक होल?
ब्लैक होल किसी तारे का आखिरी वक्त माना जा सकता है. जब कोई विशाल तारा खत्म होने की ओर होता है तो अपने ही भीतर सिकुड़ने लगता है. आखिर में ये ब्लैक होल बन जाता है जो अपने भीतर किसी भी बड़ी से बड़ी चीज को निगल सकता है.

मरते हुए तारे का आकर्षण इतना बढ़ा जाता है कि उसके भीतर का सारा पदार्थ आपस में ही सिमट जाता है और एक छोटे काले बॉल की आकृति ले लेता है. अब इसका कोई आयतन नहीं रह जाता है लेकिन घनत्व अनंत रहता है. इसके बाद ये स्पेस के सारे पिंडों को अपनी ओर खींचने लगता है. जितनी ज्यादा चीजें इसके भीतर समाती जाती है, इसकी ताकत उतनी ही बढ़ती जाती है.

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