गगनयान के यात्रियों का स्पेस सूट होगा खास, -250 डिग्री का तापमान सह सकेगा

गगनयान के यात्रियों का स्पेस सूट होगा खास, -250 डिग्री का तापमान सह सकेगा
भारत ने अंतरिक्ष मिशन गगनयान 2022 के लिए प्रयास तेज कर दिए है. (सांकेतिक फोटो)

कोरोना संक्रमण (Covid-19) और फिर देश भर में लॉकडाउन (Lockdown) होने के बाद भी भारत ने अपने अंतरिक्ष प्रोजेक्ट गगनयान (Gaganyaan) को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 2:35 PM IST
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नई दिल्ली. भारत ने अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रोजेक्ट गगनयान (Gaganyaan) को 2022 तक पूरा करने का प्रयास तेज कर दिया है. इसी क्रम में रूस (Russia) की राजधानी मास्को में मंगलवार को चार यात्रियों के लिए स्पेस सूट (Space suit) बनाने का काम शुरू हो गया है.

ये स्पेस सूट बहुत ही खास होंगे और ये अपने आप में ही अंतरिक्ष यान की सुविधाओं से लैस होंगे. यह स्पेस सूट अंतरिक्ष के तमाम खतरों से तो यात्रियों को बचाते है, साथ ही उन्हें थकान भी कम महसूस होने देंगे. आपको बता दें अंतरिक्ष मिशन में तापमान बेहद विविध होता है, कभी तापमान शून्य से -250 डिग्री नीचे चला जाता है, तो सूरज के सामने आने पर यह 250 डिग्री ऊपर पहुंच जाता है. ऐसे में ये स्पेशल सूट अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेंगे.

इसरो ने इन खास सूट को बनाने के लिए रूसी एजेंसी ग्लावकोसमोस के साथ करार किया है. जो करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले गगनयान मिशन के लिए ग्लावकोसमोस स्पेस सूट और बैकपैक बनाने का काम करेगी. आपको बता दे बैकपैक स्पेस सूट का ही एक हिस्सा होता है. जिसके अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था होती है और सांसों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के उपकरण फिट होते हैं. स्पेस सूट में तापमान कंट्रोल रखने के लिए बिजली की स्प्लाई की भी व्यवस्था की जाती है, और पीने के लिए एक वाटर टैंक भी लगाया जाता है.



वहीं इस स्पेशल सूट की कई और भी खासियत हैं जैसे कि इसमें सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए गोल्ड लाइन वाले वाइजर होंगे और ये स्पेस में धूल से बचाने का भी काम करेगा. बता दें स्पेस डस्ट सामान्य धूल की तरह सुनने में आसान लगती है, लेकिन गोली की गति से चलने वाले ये कण स्पेस में काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं. दूसरी ओर इस सूट की एक और खासियत है इसमें ऑक्सीजन, पानी की इन-बिल्ट व्यवस्था होगी
अंतरिक्ष यात्रियों के यान में बैठने की सीट कोच लाइनर्स भी रूसी एजेंसी बना रही है

ग्लावकोसमोस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिमित्री के अनुसार इसरो के साथ अंतरिक्ष यान में बैठने वाली सीट और कोच लाइनर्स के निर्माण का भी करार हुआ है. वहीं भारतीय अंतरिक्ष यात्री मिशन की ट्रेनिंग के लिए फरवरी से मास्को में हैं, जो एक साल तक मिशन की ट्रेनिंग लेंगे.
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