22 बागी MLAs को अयोग्य घोषित करने वाली याचिका पर स्पीकर का बयान 1 सप्ताह बाद : सुप्रीम कोर्ट

विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा था (फाइल फोटो)
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा था (फाइल फोटो)

विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) के लिए वकील पेश हुए और उन्होंने कहा कि उन्हें केवल कल ही याचिका (plea) की एक प्रति मिली है. इसके बाद उन्होंने मामले में उनकी ओर से जवाब (reply) दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिये जाने की मांग की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 4:47 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने निर्देश दिया है कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के 22 बागी विधायकों (Rebel MLAs) की अयोग्यता (Disqualification) पर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष (Madhya Pradesh Assembly Speaker) द्वारा निर्णय लेने की याचिका को इस संबंध में स्पीकर (Speaker) के बयान के लिए एक सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया जाए. इस संबंध में याचिका कांग्रेस विधायक (Congress MLA) विनय सक्सेना ने दायर की थी. इस मामले में उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) विवेक तन्खा ने कोर्ट को जानकारी दी कि याचिका में मामले की सुनवाई टालने के लिए अर्जी (Plea) लगाई गई है.

जब तन्खा ने अदालत को सूचित किया कि अयोग्य ठहराए जाने के अपने फैसले पर अध्यक्ष (Speaker) से प्रतिक्रिया के लिए मामला (case) सूचीबद्ध किया गया है, तो कोर्ट (Court) ने पूछा कि उनकी ओर से कौन पेश हो रहा है? विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) के लिए वकील पेश हुए और उन्होंने कहा कि उन्हें केवल कल ही याचिका (plea) की एक प्रति मिली है. इसके बाद उन्होंने मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जवाब (reply) दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिये जाने की मांग की.

"विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता का फैसला करने में 3 महीने की समयसीमा का उल्लंघन किया"
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस से बीजेपी में शामिल 22 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेने के कारण पर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष से जवाब मांगा था.
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कोर्ट ने कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता का फैसला करने के लिए 3 महीने की समयसीमा का उल्लंघन किया है. इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अभी जवाब दिया जाना बाकी है.
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