देश में आतंक फैलाने वालों पर अब रहेगी 'स्पेशल 44' की नज़र, गृह मंत्रालय ने बनाई खास टीम

देश में आतंक फैलाने वालों पर अब रहेगी 'स्पेशल 44' की नज़र, गृह मंत्रालय ने बनाई खास टीम
गृह मंत्री अमित शाह

Special 44: ये अधिकारी आतंकियों की संपत्ति पर नज़र रखेगी. साथ ही ये उनकी संपत्ति जब्त करने और बैंक एकाउंट फ्रीज़ करने का भी आदेश देगी.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार अब आंतकी गतिविधियों में शामिल लोगों (Terrorist) पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है. सरकार ने UAPA संशोधन विधेयक के नए कानून के तहत दर्ज मामलों पर कार्रवाई करने के लिए नई टीम बनाई है. इस टीम को स्पेशल 44 (SPecial 44) का नाम दिया गया है. गृह मंत्रालय (Home Ministry) के सूत्रों ने कहा है कि भारत मे आतंक फैलाने या आतंक में लिप्त पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों की सम्पति पर ये टीम नज़र रखेगी.

कौन-कौन होंगे इस टीम में?
इस टीम में 44 स्पेशल अधिकारी होंगे. इस टीम में इंटेलीजेंस ब्यूरो(IB), फाइनेंसियल इंटेलिजेंस(FIU), RBI, गृह मंत्रालय,सेबी, राज्यों की ATS, राज्यो की CID, सहित दूसरे विभाग शामिल होंगे. ये अधिकारी ऐसे लोगों पर नजर रखेगी जिनके खिलाफ UAPA कानून के तहत केस दर्ज किए गए है. ये अधिकारी आतंकियों की संपत्ति पर नज़र रखेगी. साथ ही ये उनकी संपत्ति जब्त करने और बैंक एकाउंट फ्रीज़ करने का भी आदेश देगी.

इस तरह करेगी काम
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इन 44 अधिकारियों को विदेश मंत्रालय, UN में आतंकी घोषित हुए लोगों की लिस्ट देगी जिसको गृह मंत्रालय राज्यों को शेयर करेगी. गृह मंत्रालय का ये महत्वपूर्ण कदम है जिसके तहत 44 विशेष अधिकारी विदेश मंत्रालय गृह मंत्रालय और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करके जो व्यक्ति यूएपीए कानून के तहत दोषी होगा उसकी छानबीन कर उसकी संपत्ति को जप्त करने की कार्रवाई तेज करेगी.



UAPA के तहत कार्रवाई
इसके अलावा गृह मंत्रालय ने नए UAPA कानून के तहत जो आतंकियों की लिस्ट घोषित की है उनकी भी सम्पति ढूंढकर जब्त करेगी. गृह मंत्रालय ने अबतक UAPA कानून के तहत दाऊद इब्राहिम, मसूद अज़हर, जाकिर-उर-रहमान लखवी और हाफिज सईद को आतंकवादी घोषित किया है. साथ ही 9 खालिस्तानी आतंकियों को व्यक्तिगत तौर पर UAPA के तहत आतंकी घोषित कर चुका है.

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क्या है UAPA?
यूएपीए एक बेहद सख्त कानून है और इसे आतंकवादी और देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरा पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है. ये कानून संसद द्वारा 1967 में पारित किया गया था और उसके बाद इसमें कई संशोधन हो चुके हैं. इस के तहत आरोपी को कम से कम सात साल की जेल हो सकती है.
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