INX Media Case: चिदंबरम को फिर झटका, 30 अगस्त तक बढ़ी CBI की हिरासत

चिदंबरम की सीबीआई की हिरासत को 4 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है, अब उन्हें 30 अगस्त को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

भाषा
Updated: August 26, 2019, 8:56 PM IST
INX Media Case: चिदंबरम को फिर झटका, 30 अगस्त तक बढ़ी CBI की हिरासत
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम
भाषा
Updated: August 26, 2019, 8:56 PM IST
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता पी. चिदंबरम (P Chidambaram) आईएनएक्स मीडिया  (INX Media) केस में बड़ा झटका लगा. सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया घोटाले में भ्रष्टाचार के मामले में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया.

न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि चिदंबरम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, इसलिए अग्रिम जमानत याचिका रद्द होने के खिलाफ उनकी अपील अब निरर्थक हो गयी है.

बहरहाल, पीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार पी चिदंबरम कानून के प्रावधानों के तहत राहत प्राप्त करने के लिये स्वतंत्र हैं. हालांकि, पीठ ने चिदंबरम के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धन शोधन के मामले में कांग्रेस के इस 73 वर्षीय नेता को मंगलवार तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान कर दिया.

ईडी की ओर से कल होगी बहस

पीठ धन शोधन से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर सुनवाई कर रही है. इस अपील पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता कल बहस करेंगे.

इस मामले की सुनवाई के दौरान कुछ नाटकीय स्थिति भी पैदा हुयी. सुबह पीठ के बैठते ही चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्ब्ल ने शिकायत की कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री को सीबीआई की हिरासत में देने के निचली अदालत के 22 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका न्यायालय के निर्देश के बावजूद सोमवार को सूचीबद्ध नहीं हुयी है.


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पीठ ने तीसरी अपील सूचीबद्ध करने के बारे में कोई भी आदेश दिये बगैर सिब्बल से कहा कि प्रधान न्यायाधीश से आदेश मिलने के बाद ही शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री इसे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करेगी. पीठ ने कहा, ‘‘रजिस्ट्री को कुछ दिक्कत है और उसे प्रधान न्यायाधीश से आदेश प्राप्त करना होगा.’’ इसके साथ ही पीठ ने कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश से आदेश प्राप्त करके इसे उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाये.’’

इसके बाद, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के मामलों में उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर सुनवाई शुरू हुई. यूपीए-एक और यूपीए दो सरकार में चिदंबरम 2004 से 2014 के दौरान वित्त मंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं.

2017 में सीबीआई ने दर्ज किया था पहला मामला
केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 15 मई, 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की जिसमें आरोप लगाया गया था कि आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेश से 305 करोड़ का निवेश प्राप्त करने के लिये विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड की मंजूरी देने में अनियमिततायें की गयीं. यह मंजूरी उस वक्त दी गयी थी जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे. इसके बाद, 2017 में ही प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया.

सिब्बल ने जैसे ही सीबीआई मामले में बहस शुरू की तो पीठ ने कहा, ‘‘सीबीआई का मामला अब निरर्थक हो गया है.’’ चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री को गिरफ्तार करके सीबीआई ने यह सुनिश्चित किया कि यह अपील निरर्थक हो जाये.

पीठ ने जब चिदंबरम की अपील निरर्थक होने के बारे में संविधान पीठ के एक फैसले का जिक्र किया तो सिब्बल ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता मेरा (चिदंबरम का) मौलिक अधिकार है.’’

सिब्बल ने दी ये दलीलें
सिब्बल ने 20 से 21 अगस्त तक के घटनाक्रम का ब्योरा देते हुये कहा, ‘‘सीबीआई का सारा उद्देश्य मेरे मुवक्किल को मौलिक अधिकारों और संविधान में प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करना था. उनको सुना जाना चाहिए था लेकिन मामले को बृहस्पतिवार को भी नहीं बल्कि शुक्रवार के लिये सूचीबद्ध कर दिया गया.’’

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ इस आधार पर चिदंबरम की अपील पर विचार नहीं किया जा सकता. एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जब 21 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कहा था कि उनकी अपील पर 23 अगस्त को सुनवाई की जायेगी तो सीबीआई को उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहिए था.

सिंघवी ने कहा, ‘‘अभियोजन का लंबित न्यायिक प्रक्रिया को निरर्थक बनाने का काम नहीं था. इसमें मुझे (चिदंबरम) गलत नहीं ठहराया जा सकता. मैं तो गोली की तेजी से इस न्यायालय पहुंचा था.’’

सीबीआई के तरीके पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि 21 अगस्त को इस मामले को शीघ्र सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने हेतु उल्लेख किया गया था. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता भी न्यायालय में मौजूद थे और ‘‘उनके मुवक्किल (सीबीआई) को इस तरह से आचरण नहीं करना चाहिए था.’’

पीठ ने कहा, ‘‘जहां तक सीबीआई के मामले का संबंध है तो हम उस पर सुनवाई के इच्छुक नहीं है. याचिकाकर्ता की शिकायत है कि 21 अगस्त को जल्द सुनवाई के लिये निर्देश के बावजूद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया. यह कहा गया कि बाद में याचिकाकर्ता को 21 अगस्त, 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया. ’’



पीठ ने आगे कहा, ‘‘चूंकि याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया जा चुका है, इसलिए संविधान पीठ के 1980 के फैसले के मद्देनजर हम इस विशेष अनुमति याचिका को अब निरर्थक पा रहे हैं. तद्नुसार इसे खारिज किया जाता है.’’

यह आदेश पारित होने के बाद कपिल सिब्बल ने प्रवर्तन निदेशालय के मामले में चिदंबरम की ओर से बहस शुरू की और कहा कि निष्पक्ष सुनवाई और निष्पक्ष जांच संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त अधिकार का हिस्सा है और न्यायालय को चिदंबरम के स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की रक्षा करनी चाहिए.

कोर्ट के सामने सबूत पेश करेंगे तुषार मेहता
सिब्बल की दलीलों का प्रतिवाद करते हुये सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह न्यायालय को संबंधित सामग्री दिखायेंगे जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि उनसे (चिदंबरम) हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है.

सिब्बल ने कहा कि निदेशालय ने 19 दिसंबर, 2018, एक जनवरी, 2019 और 21 जनवरी, 2019 को चिदंबरम से पूछताछ की लेकिन प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन पर लगाये गये आरोपों से संबंधित सवाल नहीं पूछे गये.

विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड की मंजूरी के बारे में सिब्बल ने कहा कि बोर्ड में भारत सरकार के छह सचिव होते हैं और उनकी मंजूरी के बाद ही वित्त मंत्री होने के नाते चिदंबरम ने सिर्फ उस पर हस्ताक्षर किये थे.

उन्होंने कहा कि निदेशालय का आरोप है कि इस मामले में छद्म कंपनियों का इस्तेमाल किया गया परंतु ऐसी कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चिदंबरम से संबंधित नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि निदेशालय की प्राथमिकी में चिदंबरम का नाम नहीं था और प्राथमिकी में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाये गये थे.

 

 

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First published: August 26, 2019, 8:30 PM IST
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