चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में घिरे पत्रकार राजीव शर्मा के बारे में स्पेशल सेल ने किए बड़े खुलासे

राजीव शर्मा (पहली फोटो में) चाइनीज़ एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल लिखते थे.
राजीव शर्मा (पहली फोटो में) चाइनीज़ एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल लिखते थे.

2016 में पत्रकार राजीव शर्मा (Rajiv Sharma) का संपर्क एक चाइनीज अफसर माइकल से लिंक्डइन के जरिए हुआ. जिसने इनको चाइना में आमंत्रित किया, जहां पर शर्मा को भारत की रक्षा, भारत चाइना सीमा से जुड़ी सूचना देने के लिए प्रलोभन दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 7:56 PM IST
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नई दिल्ली. एक सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के इनपुट पर फ्रीलांस जर्नलिस्ट राजीव शर्मा (Rajiv Sharma) जो पीतमपुरा के रहने वाले हैं, उन्हें 14 तारीख को गिरफ्तार (Arrest) किया गया. शुरुआती जांच में ये पता चला कि राजीव शर्मा चीनी इंटेलिजेंस अफसरों के सम्पर्क में हैं और यहां से संवेदनशील सूचना भेज रहे थे. इनकी पूछताछ पर एक चीनी महिला किंग शी और उसके सहयोगी नेपाली नागरिक राज बोहरा को भी गिरफ्तर किया गया है.

राजीव शर्मा 40 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. 2010 के बाद से वो फ्रीलांस जर्नलिज्म कर रहे थे. उस समय राजीव शर्मा चाइनीज़ एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल लिखते थे. 2016 में राजीव का संपर्क एक चाइनीज अफसर माइकल से लिंक्डइन के जरिए हुआ. जिसने इनको चाइना में आमंत्रित किया, जहां पर शर्मा को भारत की रक्षा, भारत चाइना सीमा से जुड़ी सूचना देने के लिए प्रलोभन दिया गया. इसके बाद राजीव ने माइकल को 2016 से 2018 तक बहुत सी सूचना पहुंचाई. 2019 में इनका संपर्क दूसरे चीनी अफसर जॉर्ज से हुआ. इस बीच इनकी मीटिंग अलग-अलग देशों मालदीव, थाईलैंड, लाओस, काठमांडू में होती रही. जहां अलग-अलग टास्किंग की गई. 2019 के बाद जॉर्ज के संपर्क में रहे और सूचना भेजते रहे. भारत-चीन सीमा से जुड़ी सूचना देते रहे. इसके लिए इनको हवाला से बड़ी रकम मिलती रही है.





एक साल में मिले 40-50 लाख
चीनी महिला और नेपाल के नागरिक ने यहां एक शेल कम्पनी बना रखी है. महिपालपुर में एमज़ेड मॉल और एमज़ेड फार्मास्युटिकल के नाम से जिसमें यहां से चाइना को दवाएं एक्सपोर्ट करते रहे हैं. उसके एवज में जो पैसे आते हैं वो पैसे इस तरह के एजेंट को दिए जाते हैं. बताया जा रहा है कि एक साल में राजीव शर्मा को 40-45 लाख रुपये आए. फिलहाल पुलिस शर्मा से पूछताछ कर रही है. शर्मा के पास से लैपटॉप, 10-12 मोबाइल फ़ोन, ATM कार्ड बरामद हुए हैं.

जो अभी तक सूचना है उसके हिसाब से ये ठीक ठाक मीडिया सर्कल में मूवमेंट करते थे. PIB कार्ड भी था. मिनिस्ट्री में एक्सेस थी. औपचारिक अनौपचारिक तौर पर लोगों से मिलते थे जो भी सूचना मिलती थी उसे  ये पास ऑन करते थे.

राजवी शर्मा ने जो सूचना चीन के लिए भेजी वो सारे सोशल मीडिया एकाउंट, मेल पर है. उन्हें डाउनलोड किया जा रहा है. उसके बाद मालूम चलेगा कि किस तरह की सूचना दी है. क्या कोई अधिकारी रैंक का मिला हुआ भी था? ये अभी जांच का विषय है. इनके हिसाब से डायरेक्ट कोई कनेक्शन नहीं मिला है.

राजीव शर्मा ने पत्रकारिता की शुरुआत 1981-82 से की है. दिल्ली के पढ़े हुए हैं. यहां वो UNI, HT, TOI, ट्रिब्यून जैसी कई मीडिया संस्थानों में काम किया है. 14 तारीख को सर्च वारंट के साथ घर की तलाशी ली गई. जिसमें कई गोपनीय जानकारी मिली है. इस चीनी महिला ने 2013 में जामिया में एडमिशन लिया था कोर्स के लिए. उसके बाद से यही पर है. उसके बाद से आना जाना रहता है. जो कम्पनी बनाई गई है दूसरे चाइनीज नेशनल ने ये कंपनी बनाई थी जाते वक़्त ये उन्हें यहां डायरेक्टर बनाकर चले गए.

चीन को भेजते थे संवेदनशील सूचनाएं

पुलिस को अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, राजीव शर्मा ग्लोबल टाइम्स में लिख रहे थे. ये सिर्फ दिखाने के लिए था. इंडो चाइना रिलेशन पर लिखते थे इसके आड़ में बहुत सारी संवेदनशील सूचनाएं चीन को पहुंचाते थे.
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