कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले राज्यों ने बंद कर दिए थे कोविड सेंटर, पैक कर दिए थे वेंटिलेटर- रिपोर्ट

कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले बंद कर दिए गए थे कोविड सेंटर. (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले बंद कर दिए गए थे कोविड सेंटर. (सांकेतिक तस्वीर)

देश के ज्‍यादातर राज्‍यों ने ये मान लिया था कि कोरोना (Corona) का संक्रमण अब खत्‍म हो गया है. कोरोना के मरीज न होने के कारण राज्‍य सरकारों ने जो कोविड सेंटर (Covid Center) पिछली बार तैयार किए थे उसे जनवरी में बंद कर दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2021, 7:57 AM IST
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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना (Corona) की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा दिया है. देश के सभी राज्‍यों में एक जैसी स्थिति दिखाई दे रही है. कहीं ऑक्‍सीजन (Oxygen) की कमी है तो कहीं मरीजों के लिए अस्‍पतालों (Hospital) में बेड कम पड़ने लगे हैं. हर दिन कोरोना संक्रमित मरीजों (Corona Patient) की संख्‍या रिकॉर्ड तोड़ रही है और देश की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की सांस फूलने लगी है. आखिर ऐसा क्‍या हुआ कि पिछले साल से भी इस साल की स्थिति ज्‍यादा खराब दिखाई दे रही है.

देश के ज्‍यादातर राज्‍यों ने ये मान लिया था कि कोरोना का संक्रमण अब खत्‍म हो गया है. कोरोना के मरीज न होने के कारण राज्‍य सरकारों ने जो कोविड सेंटर पिछली बार तैयार किए थे उसे बंद कर दिया. बताते हैं कि ज्‍यादातर राज्‍यों में जनवरी के महीने में ही कोविड सेंटर बंद कर दिए गए थे और वहां लगे वेंटिलेटर और मशीनों को पैक कर दिया गया. हालात ये हुए कि दूसरी लहर ने जब अपना असर दिखाना शुरू किया तो देश की स्थिति उसी तरह से दिखाई दे रही है जैसा कोरोना की पहली लहर के दौरान दिखाई दे रही थी.

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राज्‍यों ने कोरोना की दूसरी लहर से पहले ही उठा लिया ये कदम :-
राजधानी दिल्ली में चार अस्थायी अस्पताल, जो पिछले साल तैयार किए गए थे, फरवरी में बंद कर दिए गए थे. इसका सबसे बड़ा कारण ये था कि उस वक्‍त दिल्‍ली में हर दिन 200 से भी कम नए मामले सामने आ रहे थे. कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए इसे फिर से शुरू किया जा रहा है.
पहली लहर के दौरान, उत्तर प्रदेश ने लगभग 1.5 लाख बेड के साथ 503 कोविद अस्पताल तैयार करने का दावा किया था. हालांकि फरवरी के पहले सप्‍ताह तक यहां पर 83 अस्‍पताल ही बचे और बिस्‍तरों की संख्‍या घटकर मात्र 17,000 ही रह गई. ये वो अस्‍पताल थे जहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता था.
कोरोना की पहली लहर के दौरान दूसरे सबसे प्रभावित राज्‍य में शामिल कर्नाटक ने पिछले साल से कोई सबक नहीं सीखा. पिछले साल से अब तक कर्नाटक सरकार ने मात्र 18 आईसीयू बेड बढ़ाए हैं.
पुणे में 800 बिस्‍तरों वाले जंबो अस्‍पताल को जनवरी में कोरोना मरीजों की कम संख्‍या को देखते हुए बंद कर दिया गया था. हालांकि इसे मार्च में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए फिर से खोल दिया गया था.
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स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थाओं के मामले में देश में बिहार का हाल सबसे ज्‍यादा बेहाल है. बिहार के 38 जिलों में से केवल 10 में पांच से अधिक वेंटिलेटर हैं.
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