केरलः विशु त्यौहार के लिए खुला सबरीमला मंदिर, विशेष पूजा का आयोजन

केरल भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि सबरीमला के संदर्भ में विजयन की टिप्पणी उनकी ‘कमजोरी’ दिखाती है. ANI

केरल भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि सबरीमला के संदर्भ में विजयन की टिप्पणी उनकी ‘कमजोरी’ दिखाती है. ANI

Kerala Assembly Election 2021: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि सबरीमला के मुख्य देव भगवान अयप्पा और अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद एलडीएफ सरकार के साथ है, जिसने लोगों के कल्याण के लिए काम किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 9:34 PM IST
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नई दिल्ली. केरल स्थित भगवान अयप्पा के सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple) में शनिवार को विशेष पूजा का आयोजन किया गया. केरल में मनाए जाने वाले विशु त्यौहार से पहले शनिवार को मंदिर को खोला है. कोरोना संक्रमण के बीच मंदिर खुलने के बाद कई सारे श्रद्धालु भी दर्शन पूजन के लिए पहुंचे. बता दें कि केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Election 2021) में सबरीमला का मुद्दा छाया रहा है और सत्तारूढ़ एलडीएफ से कांग्रेस नीत यूडीएफ ने भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं से कई वादे किए हैं. विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ LDF (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) को निशाने पर लेने के लिए विपक्षी UDF (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) और राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने ‘सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश’ के मुद्दे को प्राथमिकता दी थी.

राज्य में मंगलवार को मतदान के दिन भी यह मुद्दा बहस का केंद्र रहा और बड़े नेता इस विषय पर एक दूसरे से उलझे रहे. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि सबरीमला के मुख्य देव भगवान अयप्पा और अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद एलडीएफ सरकार के साथ है, जिसने लोगों के कल्याण के लिए काम किया है. विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस चुनाव में वाममोर्चा सरकार निश्चित ही भगवान अयप्पा एवं उनके श्रद्धालुओं के कोप का भाजन बनेगी. विजयन को निशाने पर लेते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि तीन साल पहले सबरीमला में मुख्यमंत्री ने जो कुछ किया, वह ‘आसुरी कृत्य’ था और राज्य के लोग उनके ‘कपट भरे इस कर्म’ को नहीं भूलेंगे.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मचा बवाल

बता दें कि जब एलडीएफ सरकार ने सबरीमला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति संबंधी सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश को लागू करने का निर्णय किया था, तब केरल में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने हिंसक प्रदर्शन किया था. पारंपरिक रूप से इस मंदिर में 10 से 50 साल तक आयु वर्ग (माहवारी आयु वर्ग) की महिलाओं का प्रवेश निषिद्ध है. चुनाव के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया, क्योंकि दोनों ही मोर्चों से कई बड़े नेता मुख्यमंत्री के बयान के समर्थन एवं विरोध में सामने आ गये.
यह तब शुरू हुआ जब प्रभावी हिंदू नायर समुदाय से जुड़े संगठन नायर सर्विस सोयायटी के महासचिव सुकुमारन नायर ने मंगलवार को कहा कि केरल के लोग शासन में बदलाव चाहते हैं. एलडीएफ को परोक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए नायर ने कहा कि अयप्पा के श्रद्धालुओं का विरोध अब भी जारी है. जब कन्नूर में मुख्यमंत्री से उनकी प्रतिक्रिया मांगी तब उन्होंने कहा कि वह नहीं समझते कि सुकुमारन नायर राज्य सरकार के विरूद्ध कुछ भी कहेंगे.

'माफ नहीं करेंगे अयप्पा के श्रद्धालु'

उन्होंने कहा, ‘‘वह एक अयप्पा श्रद्धालु हैं. अयप्पा और अन्य सभी देवताओं का आशीर्वाद इस सरकार के साथ है, जिसने सभी धर्मों के लोगों के हितों की रक्षा की है. भगवान हमेशा उनके साथ रहते है, जो लोगों के लिए अच्छा करते हैं.’’ विजयन वोट डालने के बाद प्रेस के सवालों का जवाब दे रहे थे. इस पर चेन्निथला ने कहा कि क्या नास्तिक विजयन चुनाव जीतने के लिए भगवान अयप्पा का आशीर्वाद लेने का प्रयास कर रहे हैं, ‘‘लेकिन न तो भगवान अयप्पा और न ही उनके श्रद्धालु उनकी संवेदनाओं को आहत करने के लिए उन्हें माफ करेंगे.’’





सुरेंद्रन ने कहा कि सबरीमला के संदर्भ में विजयन की टिप्पणी उनकी ‘कमजोरी’ दिखाती है. उन्होंने कहा, ‘‘पिनाराई विजयन वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अयप्पा श्रद्धालुओं को सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश के बाद हड़ताल करने की चुनौती दी थी.’’ पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा, ‘‘केरल में एक भी श्रद्धालु उनकी बातों पर विश्वास नहीं करेगा.’’
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