कोरोना के खिलाफ कितनी असरदार है रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-V? जानें हर सवाल का जवाब

स्पुतनिक-V वैक्सीन का इस्तेमाल रूस में पिछले साल अगस्त से ही किया जा रहा है.

स्पुतनिक-V वैक्सीन का इस्तेमाल रूस में पिछले साल अगस्त से ही किया जा रहा है.

Sputnik V: भारत में इस वैक्सीन का इस्तेमाल इस महीने के आखिरी हफ्ते में या फिर मई से शुरू हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक इस वैक्सीन की करीब 10 करोड़ खुराक अगले छह-सात महीने में आयात किये जाने की संभावना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 5:59 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक और वैक्सीन मिल गई है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V (Sputnik V) को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही अब भारत के पास तीन वैक्सीन हो गई हैं. इस साल जनवरी में सरकार ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन को मंजूरी दी थी. स्पुतनिक-V वैक्सीन का इस्तेमाल रूस में पिछले साल अगस्त से ही किया जा रहा है. बता दें कि अब तक इस वैक्सीन को 60 देशों में इस्तेमाल की इजाजत मिल चुकी है.

भारत में इस वैक्सीन का इस्तेमाल इस महीने के आखिरी हफ्ते में या फिर मई से शुरू हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक इस वैक्सीन की करीब 10 करोड़ खुराक अगले छह-सात महीने में आयात किये जाने की संभावना है. आइए सवाल जवाब के जरिए इस वैक्सीन के साइड इफेक्ट, इसकी डोज़ और कीमत के बारे में जानते हैं....

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  • इस वैक्सीन को किस कंपनी ने बनाया है?

    इस वैक्सीन को मास्को में गैमलेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने तैयार किया है. पिछले साल अगस्त में इसे रूस की सरकार ने हरी झंडी दी थी. इस वैक्सीन में दो अलग-अलग वायरस का इस्तेमाल किया गया है.


  • कितने डिग्री पर रखा जाता है इस वैक्सीन को?

    स्पुतनिक को 2 से 8℃ के तापमान पर स्‍टोर किया जा सकता है. यानी एक साधारण फ्रिज में रखा जा सकता है. लिहाजा सरकार को इसे रखने के लिए किसी कोल्ड चेन में पैसे लगाने की जरूरत नहीं है.


  • कितने डोज़ की जरूरत?

    कोविशील्ड और कोवैक्सीन की तरह इस वैक्सीन की भी दो डोज़ लागई जाएंगी. दो डोज़ के बीच 21 दिनों का अंतर रखा जाएगा.


  • कितनी असरदार है ये वैक्सीन?

    अमेरिका की फ़ाइजर और मॉडर्ना से बाद दुनिया में सबसे ज्यादा असरदार है स्पुतनिक V वैक्सीन. स्पूतनिक V की एफेकसी 91.5% है. सीरम इंस्‍टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्‍सीन की एफीकेसी 62% दर्ज की गई थी. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्‍तेमाल 4 फेज के ट्रायल में ही शुरू हो गया था. उस समय इसने 81% की एफेकसी हासिल की थी.


  • क्या इस वैक्सीन का कोई साइड इफ्केट भी है?

    अप्रैल के पहले हफ्ते में रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा था कि इस वैक्सीन का साइड इफेक्ट सिर्फ 0.1 फीसदी है.


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