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श्रीलंका संकटः भारत ने 'पड़ोसी पहले' की नीति का जिक्र करते हुए बढ़ाया मदद का हाथ

श्रीलंका में सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में अब तक 8 लोग मारे जा चुके हैं. (फोटो साभार सोशल मीडिया)

श्रीलंका में सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में अब तक 8 लोग मारे जा चुके हैं. (फोटो साभार सोशल मीडिया)

India reacts on Sri lanka crisis: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान में कहा कि भारत पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की अपनी नीति के मद्देनजर श्रीलंका को मौजूदा संकट से निपटने के लिए साल 2022 में अब तक 3.5 अरब डॉलर की मदद दे चुका है. भोजन, दवा जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की गई है. आगे भी श्रीलंका के हित के लिए प्रयास जारी रहेंगे.

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नई दिल्लीः गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शन ने हिंसक मोड़ ले लिया है. श्रीलंका के मौजूदा संकट पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. एक पड़ोसी के तौर पर हम श्रीलंका में लोकतंत्र, स्थायित्व और आर्थिक बहाली का पूरी तरह समर्थन करते हैं और इसमें सहायता करते रहेंगे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की अपनी नीति के मद्देनजर भारत ने श्रीलंका को मौजूदा संकट से निपटने के लिए साल 2022 में ही अब तक 3.5 अरब डॉलर की मदद दे चुका है. जरूरी चीजों की किल्लत दूर करने के लिए भारत की ओर से काफी सहायता दी गई है. भारत की ओर से भोजन, दवा जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की गई है. आगे भी श्रीलंका के हित के लिए प्रयास जारी रहेंगे.” उन्होंने कहा कि भारत आगे भी हमेशा श्रीलंका के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए लोकतांत्रिक रूप से की गई प्रक्रियाओं पर काम करता रहेगा.

भारत सरकार की ये प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब सोमवार को प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद श्रीलंका में सरकार विरोधी और समर्थकों के बीच जमकर हिंसा हुई थी. 12 सांसदों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया था. हिंसा में अब तक कम से कम 8 लोगों की मौत की खबर है और 200 से ज्यादा घायल हो चुके हैं. पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है. राजधानी कोलंबो में हालात संभालने के लिए सेना को उतारा गया है.

महिंदा राजपक्षे ने अपने इस्तीफे में कहा था कि वह सर्वदलीय अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ करने के लिए प्रधानमंत्री पद छोड़ रहे हैं. महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे से कैबिनेट अपने आप भंग हो गई है. देश में एक तरह से राष्ट्रपति शासन हो गया है. देश की कमान महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के हाथों में आ गई है.

वर्ष 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. यह संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ, जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है. 9 अप्रैल से पूरे श्रीलंका में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं, क्योंकि सरकार के पास आयात के लिए पैसा खत्म हो गया है. आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं.

Tags: India, Sri lanka

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