CIC ने की RTI कानून में संशोधन का प्रस्तावित विधेयक वापस लेने की मांग

आचार्युलू ने आरटीआई कानून में संशोधन करने वाले प्रस्तावित विधेयक को पूरी तरह से वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी प्रारूप में किसी बदलाव की कोई जरूरत नहीं है.

भाषा
Updated: August 23, 2018, 10:33 PM IST
CIC ने की RTI कानून में संशोधन का प्रस्तावित विधेयक वापस लेने की मांग
प्रतीकात्मक फोटो
भाषा
Updated: August 23, 2018, 10:33 PM IST
केंद्रीय सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्युलू ने गुरुवार को कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून में प्रस्तावित संशोधन केंद्रीय सूचना आयोग की स्वतंत्रता को तहत नहस कर देगा और इसके तहत सूचना मांगने की लोगों की शक्ति कमजोर कर देगा.

आचार्युलू ने आरटीआई कानून में संशोधन करने वाले प्रस्तावित विधेयक को पूरी तरह से वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी प्रारूप में किसी बदलाव की कोई जरूरत नहीं है.

गौरतलब है कि सरकार ने कहा था कि वह मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और सूचना आयुक्तों के वेतन और सेवाओं पर नियम बनाने के लिए 2005 के इस कानून में संशोधन करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

सूचना आयुक्त ने बताया कि इस साल 18 जुलाई को राज्य सभा में सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2018 पेश करने की अनुमति मांगी गई थी लेकिन यह नहीं मिली. उन्होंने कहा , ‘‘मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि क्या उन्हें पूरी तरह से वापस ले लिया गया. उन्होंने संसद के हालिया सत्र में इसे (विधेयक को) पेश नहीं किया और मैं (इसे लेकर) खुश हूं. हालांकि, यदि वे आगे भी इसे पेश नहीं करेंगे, तो मुझे और भी खुशी होगी.’’

आचार्युलू ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक को पूरी तरह से वापस ले लेना चाहिए और इसे पेश नहीं करना चाहिए. यह सीआईसी की स्वतंत्रता को तहस-नहस कर देगा और यह निश्चित रूप से आयोग को कमजोर करेगा. यह सूचना मांगने की लोगों की शक्ति को भी कमजोर करेगा.

वह पिछले महीने आयोग में अपने सहकर्मियों को लिखे पत्र में इस चिंता से उन्हें वाकिफ करा चुके हैं. उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सरकार इस चिंता को समझे और किसी भी प्रारूप में कोई संशोधन नहीं करे.

उन्होंने कहा कि किसी तरह के संशोधन की कोई जरूरत नहीं है और संस्था और अधिनियम को संरक्षित किया जाना चाहिए.
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आचार्युलू ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को भी यह वादा करना चाहिए कि सत्ता में आने पर वे आरटीआई कानून को कमजोर नहीं करेंगे.

उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक केंद्र और राज्य सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता को कमजोर करने की कोशिशें हैं और उन्होंने इसे वापस लेने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त को प्रस्तावित विधेयक वापस लेने का अनुरोध करने के लिए सरकार को एक आधिकारिक पत्र भेजने को कहा था.
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