ISRO के 100वें एेतिहासिक लॉन्च की दस खास बातें

PSLV C-40 अपने साथ सबसे भारी कार्टोसैट 2 सीरीज के उपग्रह के अलावा 30 दूसरी सैटलाइट अंतरिक्ष में लेकर गया है.

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Updated: January 12, 2018, 10:06 AM IST
ISRO के 100वें एेतिहासिक लॉन्च की दस खास बातें
(Image:ISRO)
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Updated: January 12, 2018, 10:06 AM IST
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना 100वां उपग्रह कार्टोसेट-2 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. चेन्नई से 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इस 100वें उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजे गए हैं. आइए जानते हैं लॉन्च से जुड़ी 10 खास बातें...

1. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का सौवां उपग्रह लॉन्च हो गया है. ये सौवां सेटेलाइट कार्टोसेट-2 है. इसके साथ ही इस 30 अन्य सैटेलाइट इसके साथ इसरो में अंतरिक्ष में भेजे हैं. पिछले साल अगस्त में नाकाम हुई उड़ान के बाद इसरो ने उन खामियों को दूर कर लिया है.

2. इन 31 सैटेलाइट को लेकर इसरो का जो रॉकेट अंतरिक्ष लेकर गया है, उसका नाम PSLV C-40 है. ये रॉकेट जिन 31 सैटेलाइट को अपने साथ लेकर गया, उसमें सबसे भारी कार्टोसैट-2 है.

3. सेटेलाइट का लॉन्च एक मिनट देर से हुआ, लेकिन ये बहुत सफलता के साथ हुआ. चारों चरण सामान्य तरीके से पूरे किए गए.

4. 31 सैटेलाइट में एक भारतीय माइक्रो सैटेलाइट और एक नैनो सैटेलाइट के अलावा 28 छोटे विदेशी उपग्रह हैं.

5. पृथ्वी के अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 प्राथमिक उपग्रह है , जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल है.

6. पीएसएलवी-सी40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन है. पीएसएलवी का ये रॉकेट अपने साथ कुछ 1332 किलो वजन के 31 उपग्रह लेकर गया है.

7. 09.29 बजे की लॉन्च के बीस मिनट के भीतर सैटेलाइट एक-एक करके पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में स्थापित होने लगे. सबसे पहले कार्टोसेट-2 कक्षा में स्थापित हुआ. इसके बाद एक एक करके दूसरे उपग्रह स्थापित होते चले गए.

8. इसरो का रॉकेट जिन देशों के सैटेलाइट लेकर अंतरिक्ष में लेकर गया है, उसमें कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, गणराज्य कोरिया, यूके और यूएसए के माइक्रो और नैनो उपग्रह शामिल हैं. 28 उपग्रहों में 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं.

9 . इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को इसरो और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत लॉन्च किया गया.

10. इससे पहले 31 अगस्त 2017 में इसरो का सैटेलाइट लांच प्रोग्राम नाकाम रहा था, लेकिन इस बार इसरो के वैज्ञानिकों ने कोई खामी इस लांच में नहीं रहने दी. सबकुछ बहुत व्यवस्थित तरीके से होता चला गया. हर चरण सामान्य तरीके से पूरा हुआ. पीएसएलवी-सी40 साल 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है.
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