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इसरो ने लॉन्च किया GSAT-7A सैटेलाइट, वायुसेना के लिए ऐसे होगा फायदेमंद

फोटो- ट्विटर

फोटो- ट्विटर

इस सैटलाइट की लागत 500-800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इसका जीवन 8 साल है. इसमें 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनके जरिए करीब 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा की जा सकती है.

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    इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने अपने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ11/ GSAT-7A को लॉन्च कर दिया गया है. आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन से GSAT- 7A को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. इसे पृथ्वी के जियो ऑर्बिट (कक्षा) में स्थापित किया जाएगा. इस सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित हो जाने से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय वायुसेना को होगा.

    GSAT-7A से वायुसेना के एयरबेस इंटरलिंक होंगे. इसके जरिए ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद मिलेगी. इस सैटेलाइट से ड्रोन आधारित ऑपरेशंस में एयरफोर्स की ग्राउंड रेंज में खासा इजाफा हो जाएगा.

    वायुसेना के लिए कैसे मददगार होगी GSAT-7A सैटेलाइट?

    इस सैटलाइट की लागत 500-800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इसका जीवन 8 साल है. इसमें 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनके जरिए करीब 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा की जा सकती है. इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी दिया गया है.  ये भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के यूजर्स को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा.



    भारतीय वायुसेना के लिए क्यों खास है GSAT-7A?

    इस कम्युनिकेशन सैटेलाइट के जरिए भारतीय वायुसेना अपने सारे रेडार स्टेशनों को आपस में जोड़ सकेगी. इतना ही नहीं इसके जरिए सारे एयरबेस और अवाक्स स्पेसक्राफ्ट भी आपस में आसानी से बातचीत कर सकेंगे. ये अवाक्स विमान हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली का ही हिस्सा होते हैं. अवाक्स को आसमान में आंख भी कहा जाता है. यह 400 वर्गकिमी एरिया में दुश्मन की हरकत पर नज़र रख सकने वाला सिस्टम है.

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    इतना ही नहीं इस सैटेलाइट के जरिए ड्रोन से जुड़े ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी. यह ऐसे होगा कि जिन ऑपरेशन को वर्तमान में वायुसेना को जमीन से संचालित करना पड़ता है, उन्हें वे सीधे सैटेलाइट से संचालित कर सकेगा.

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