SSR Death Case: सुशांत की मौत की जांच और इस पर सियासत में आगे क्या हो सकता है?

SSR Death Case: सुशांत की मौत की जांच और इस पर सियासत में आगे क्या हो सकता है?
सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच को लेकर बिहार और महाराष्ट्र सरकार में रार छिड़ गई है

सरकार कानूनी सलाह (Legal Advice) के आधार पर जांच मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के पास रखना चाहती है, अगर ये जांच सीबीआई (CBI) की तरफ से शुरु हो जाती है तो इसमें सरकार की नाकामी के साथ मुंबई पुलिस की शाख पर भी बट्टा लग जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 7:58 PM IST
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मुंबई. इस समय सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला (Sushant Singh Rajput Death Case) सियासत के लिए कितना महत्वपूर्ण हो गया है, इसी बात से समझा जा सकता है कि इस आत्महत्या (suicide) की जांच के लिए महाराष्ट्र और बिहार सरकार (Bihar Government) के बीच सियासी तलवारें खिच गई हैं. महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) अपनी पूरी तैयारी कर ली है. आखिर सुप्रीम कोर्ट मे सीबीआई जांच (CBI Investigation) को लेकर होने वाली मामले की सुनवाई के लिए हर कानूनी (legal) दांव-पेंच का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सरकार कानूनी सलाह के आधार पर जांच मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के पास रखना चाहती है, अगर ये जांच सीबीआई (CBI) की तरफ से शुरु हो जाती है तो इसमें सरकार की नाकामी के साथ मुंबई पुलिस की शाख पर भी बट्टा लग जाएगा. साथ ही सरकार को डर है कि सुशांत की जांच के बहाने बीजेपी (BJP) शासित केंद्र सरकार राज्य की सरकार को गिराने की साजिश भी कर सकती है क्योकि कई राजनेताओं ने आरोप लगाया है कि इस आत्महत्या के रहस्य में आदित्य ठाकरे (Aditya Thackrey) का नाम भी है. हालांकि आदित्य इस मामले से पहले ही अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार कर चुके हैं. लेकिन महाविकास अघाड़ी को डर है कि इससे सरकार आदित्य ठाकरे और शिवसेना (Shiv Sena) को परेशान कर सकती है और राज्य सरकार गिरा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के न मानने पर 11 तारीख के बाद अगली रणनीति का खुलासा करेगी सरकार
इसलिए सरकार 11 अगस्त के लिए सरकार ने हर तैयारी की है, जिससे सुप्रीम कोर्ट को ये समझाया जा सके कि बिहार सरकार ने जो जांच के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी थी वो गलत है.
गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि सरकार अभी मुंबई पुलिस से ही जांच कराने के पक्ष में है और सुप्रीम कोर्ट में अपनी हर बात और जांच से जुड़े पहलू रखेगी, अगर सुप्रीम कोर्ट नहीं मानती है तो 11 अगस्त के बाद सरकार अपनी अगली रणनीति का खुलासा करेगी.



बीजेपी की जांच अधिकारी को निलंबित किये जाने की मांग
हालांकि सूत्र बताते है कि सुशांत केस के वजह से महाविकास अघाड़ी में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है क्योकि बिहार चुनाव के चलते कांग्रेस उस आक्रामक तरीके से विरोध नहीं कर पा रही है. हालाकि मुंबई पुलिस का सपोर्ट कर रही है लेकिन आदित्य को लेकर चुप्पी बरकार है.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की मानें तो जांच बिहार चुनाव के मद्देनजर अचानक मोड़ी जा रही है जबकि महाराष्ट्र सरकार से सीबीआई जांच के बारे में नहीं पूछा गया, जो राज्य सरकार के अधिकार का उल्लंघन है. हालांकि बीजेपी सुशांत के मुद्दे पर आक्रामक होते हुए जांच अधिकारी को निलंबित करने की मांग कर रही है

CBI के अधिकारियों पर भी लागू हो सकते हैं क्वारंटाइन के नियम
हालांकि सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र सरकार बीएमसी को क्वारंटाइन नियमों को और कड़ा करने के लिए कह चुकी है, जिससे सीबीआई को भी इस दायरे में लाया जा सके. बीएमसी ने विनय तिवारी के क्वारंटाइन मामले के तूल पकड़ने के बाद नियम और सख्त बनाते हुए कहा है कि घरेलू यात्रियों के लिए नियम 14 दिन होंगे, इसमें सरकारी अधिकारी भी शामिल होंगे. कुछ लोग आई कार्ड दिखाकर इस नियम से बचते थे लेकिन अब ये सबके लिए लागू होगा. सूत्रों का ये भी दावा है कि अगर सीबीआई टीम के लोग भी बाहर से मुंबई आते हैं तो उन पर बीएमसी के नियम लागू हो सकते हैं.

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इस बीच महाराष्ट्र बीजेपी के उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पाण्डेय ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि रिया चक्रवर्ती और दूसरे आरोपियो को प्रोटेक्टिव कस्टडी में लिया जाये. उन्होंने अंदेशा जताया है कि इनकी भी हत्या हो सकती है. बीजेपी नेता को अंदेशा है कि अगर इन लोगों को कुछ हुआ तो सुशांत को न्याय नहीं मिलेगा.
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