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बाढ़ से असम पर पड़ रही दोहरी मार पर सोनोवाल बोले- राज्य और केंद्र खोज रहे दीर्घकालिक समाधान

बाढ़ प्रभावित लोग 16 जुलाई 2020 को असम के मोरीगांव जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे अपने डूबे हुए घर के पास एक अस्थायी ढांचे में शरण लिए हुए (AP फोटो / अनुपम नाथ)

बाढ़ प्रभावित लोग 16 जुलाई 2020 को असम के मोरीगांव जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे अपने डूबे हुए घर के पास एक अस्थायी ढांचे में शरण लिए हुए (AP फोटो / अनुपम नाथ)

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Chief Minister Sarbananda Sonowal), जो अगले साल के विधानसभा चुनावों में असम भाजपा का नेतृत्व करेंगे, ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार वार्षिक बाढ़ (annual floods) से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान (long-term solution) ढूंढ रही हैं.

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    (पायल मेहता)

    गुवाहाटी. जबकि भारत बढ़ती हुई कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) से जूझ रहा है, असम (Assam) पर गांवों को डुबाने वाले बाढ़ के पानी (Food Water) के चलते दोगुनी मार पड़ी है. इस बाढ़ में अब तक 102 लोगों की जान चली गई है. बारिश से उत्पन्न भूस्खलन (landslides) में और 26 लोगों की मौत हो गई है. 23 जिलों में बाढ़ की वजह से कुल 24.76 लाख लोग मारे गए हैं, जिनमें गोलपारा (Goalpara) सबसे ज्यादा प्रभावित है. बाढ़ से काजीरंगा (Kaziranga) के वन्यजीव क्षेत्रों में भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है.

    News18 से बात करते हुए, मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Chief Minister Sarbananda Sonowal), जो अगले साल के विधानसभा चुनावों (assembly elections) में असम भाजपा का नेतृत्व करेंगे, ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार वार्षिक बाढ़ (annual floods) से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान (long-term solution) ढूंढ रही हैं.

    बाढ़ से निपटने के लिए राष्ट्रीय समिति का गठन, नीति आयोग के उपाध्यक्ष बने इसके अध्यक्ष
    मुख्यमंत्री ने बताया, “आजादी के बाद पहली बार, किसी प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रुचि ली है और (इसके लिए) राष्ट्रीय स्तर पर एक समर्पित समिति का गठन किया है. इस समिति की अध्यक्षता NITI Aayog के उपाध्यक्ष कर रहे हैं और इसे उत्तर-पूर्व जल प्रबंधन प्राधिकरण कहा गया है, जिसमें सभी पूर्वोत्तर राज्यों को बोर्ड में शामिल किया गया है. समिति में सभी सात राज्यों से एक-एक सदस्य शामिल किया गया है."

    सोनोवाल ने कहा,“समिति वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ और कटाव के लिए दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी. हम इस अध्ययन के साथ आगे बढ़ रहे हैं और बहुत उम्मीद है कि एक बार यह पूरा हो जाने के बाद, यह हमें दीर्घकालिक समाधान प्रदान करेगा.”

    'सिर्फ कोरोना वायरस और बाढ़ से परेशान नहीं है असम'
    राज्य कठिन दौर से गुजर रहा है, इस बात को स्वीकार करते हुए, सीएम ने कहा कि असम जिन परेशानियों का सामना कर रहा है, वे मुद्दे केवल कोरोना वायरस और बाढ़ नहीं हैं.

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    उन्होंने कहा, “न केवल बाढ़ और कोविड-19, बल्कि हम अफ्रीकी फ्लू, बिजली गिरने, गैस रिसाव और भूस्खलन से भी निपट रहे हैं. हमारे लिए काफी चुनौतियां हैं. असम के लोग संयुक्त रूप से इससे लड़ रहे हैं."

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