गणपति बप्पा निकले सात समंदर पार, 22 दिन लंबी होगी यात्रा

मुंबई से सटे उपनगरीय इलाके आंबवणे यांच्या गणेश चित्रकला मंदिर पिछले कई दशक से मॉरीशस और इंडोनेशिया में बसे भारतीयों को गणेश चतुर्थी के मौके पर मूर्ति की सप्लाई करता आ रहा है.

मुंबई से सटे उपनगरीय इलाके आंबवणे यांच्या गणेश चित्रकला मंदिर पिछले कई दशक से मॉरीशस और इंडोनेशिया में बसे भारतीयों को गणेश चतुर्थी के मौके पर मूर्ति की सप्लाई करता आ रहा है.

मुंबई से सटे उपनगरीय इलाके आंबवणे यांच्या गणेश चित्रकला मंदिर पिछले कई दशक से मॉरीशस और इंडोनेशिया में बसे भारतीयों को गणेश चतुर्थी के मौके पर मूर्ति की सप्लाई करता आ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2018, 9:14 PM IST
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गणेशोत्सव शुरू होने में अभी करीब सवा महीने का वक्त है. गणपति बप्पा के भक्त उनके आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे है, तो बीच गणेश प्रतिमाओं को बनाने का सिलसिला भी जोरों पर चल रहा है. इन सबके के बीच खुद गणपति बप्पा भी सात समंदर पार सफर के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पहले वह अपने भक्तों के पास पहुंच सकें.



दरअसल, गणेशोत्सव की धूम न केवल भारत में रहती है, बल्कि सात समंदर पार विदेशों में बसने वाले भारतीय भी इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं. इसके लिए मुंबई में विशेष ऑर्डर देकर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का निर्माण कराया जाता है. यह सारी प्रतिमाएं अब तैयार होकर दूसरे देशों के लिए रवाना हो चुकी है.



मुंबई से सटे उपनगरीय इलाके आंबवणे यांच्या गणेश चित्रकला मंदिर पिछले कई दशक से मॉरीशस और इंडोनेशिया में बसे भारतीयों को गणेश चतुर्थी के मौके पर मूर्ती की सप्लाई करता आ रहा है.





भगवान गणेश की मूर्ति को अंतिम रूप देती कलाकार

विशालकाय आकार और बेहद सावधानीपूर्वक की गई पैकिंग की वजह से हवाई मार्ग के जरिए इन्हें विदेश भेजना संभव नहीं होता है. इस वजह से गणेश प्रतिमाओं को समंदर के रास्ते मॉरीशस और इंडोनेशिया रवाना किया गया. करीब 20 से 22 दिनों का सफर तय कर यह प्रतिमाएं दोनों देशों में पहुंचेंगी.



बदलापुर में रहने वाले आबंवणे परिवार के गणेश चित्रकला मंदिर से पिछले 15 साल से मॉरीशस और इंडोनेशिया में गणेश भक्तों के लिए मूर्तियां तैयार कर भेजी जा रही है. इस बार भी 250 प्रतिमाएं मॉरीशस समंदर के रास्ते जहाज से रवाना की गई है.



इस केंद्र में अलग-अलग तरीके की 105 मूर्तियां तैयार की जाती है. विदेशों के अलावा ठाणे, मुंबई, सातारा, नाशिक सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में यहां से विशेष डिमांड पर मूर्ती सप्लाई की जाती है. इस केंद्र की खास बात यह है कि यहां महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है. इस वजह से उन्हें बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध होता है.
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