मेहनतकशों की टूटती आस! 2019 में खुदकुशी करने वालों में हर चौथा शख्स दिहाड़ी मजदूर: NCRB

मेहनतकशों की टूटती आस! 2019 में खुदकुशी करने वालों में हर चौथा शख्स दिहाड़ी मजदूर: NCRB
दिहाड़ी मजदूरों में आत्महत्या की संख्या 2014 में 15,735 से बढ़कर 2019 में 32,563 हो गई.

Daily wagers Suicides: आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें दिहाड़ी मजदूरों की संख्या करीब एक चौथाई यानी 32,563 थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 6, 2020, 7:22 AM IST
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नई दिल्ली. पिछले कुछ सालों से दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wagers) में आत्महत्या की दर काफी ज्यादा बढ़ी है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, पिछले 6 सालों में इनके आत्महत्या (Suicide) की दर दोगुनी हो गई है. पिछले साल यानी 2019 में आत्महत्या के कुल दर्ज मामलों में 23.4 फीसदी दिहाड़ी मजदूरों के थे. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें दिहाड़ी मजदूरों की संख्या करीब एक चौथाई यानी 32,563 थी. बता दें कि इन आंकड़ों में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर शामिल नहीं हैं.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा मौत
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 5,186 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की. इसके बाद महाराष्ट्र (4,128), मध्य प्रदेश (3,964), तेलंगाना (2,858) और केरल (2,809) में आत्महत्या करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही. आंकड़ों के मुताबिक 2019 में घर में रहने वाली महिलाओं (हाउस वाइफ) ने काफी ज्यादा संख्या में आत्महत्या की. इस दौरान 21,359 या फिर 15.4 प्रतिशत इन महिलाओं ने अपनी जान ली. हालांकि, आत्महत्याओं में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की संख्या में भी कमी आई है. कृषि मजदूर, कृषि क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों के तहत एक अलग उप-श्रेणी है और 2019 में कुल आत्महत्याओं के 3.1 प्रतिशत यहीं लोग हैं.

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6 साल में दोगुनी हुई संख्या


NRCB ने साल 2014 से ही 'एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सूइसाइड्स' डेटा में दिहाड़ी मजदूरों को वर्गीकृत करना शुरू किया. उस साल आत्महत्या से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. लेकिन ये आंकड़ा अब तेजी से बढ़ रहा है - 2015 में 17.8 परसेंट, 2016 में 19.2%, 2017 में 22.1% , 2018 में 22.4% और पिछले साल 23.4% रहा. निरपेक्ष रूप से भी, यानी दिहाड़ी मजदूरों में आत्महत्या की संख्या 2014 में 15,735 से बढ़कर 2019 में 32,563 हो गई.
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