ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने स्टील कंपनियां आईं आगे, सरकार की कर रही मदद

ऑक्‍सीजन की तेजी से हो रही है सप्‍लाई. (Pic- News18)

ऑक्‍सीजन की तेजी से हो रही है सप्‍लाई. (Pic- News18)

Coronavirus Oxygen Crisis: 24 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक स्टील सेक्टर ने अपनी क्षमता से ज्यादा 3474 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध करा दी है. ताकि जनता को राहत मिल सके.

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  • Last Updated: April 25, 2021, 10:36 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के इस दूसरे हमले के बाद जब देश ऑक्सीजन  (Oxygen) की कमी से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने युद्ध स्तर पर मोर्चा संभाला. पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों से भी इस संकट से निपटने में पूरी तरह जुट जाने की अपील की. ऐसे में स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी दिन रात एक कर सभी स्टील कंपनियों को एकजुट किया.

इसका नतीजा यह हुआ कि 24 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक स्टील सेक्टर ने अपनी क्षमता से ज्यादा 3474 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध करा दी है. ताकि जनता को राहत मिल सके. स्टील उद्योग में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 33 ऑक्सीजन प्लांट हैं. इनमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की कुल उत्पादन क्षमता 2834 मीट्रिक टन है. लेकिन नाइट्रोजन और आर्गन का उत्पादन कम करके इन सभी कंपनियों ने देश हित में मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता बढ़ाई है, जिसे विभिन्न राज्यों में भेजा जा चुका है. 24 अप्रैल तक 2894 मीट्रिक टन स्टील प्लांटों से भेजी जा चुकी है.

स्टील प्लांटों में ये संभव हो सका क्योंकि ये सभी सातों दिन 24 घंटे काम कर रहे हैं. ये प्लांट न सिर्फ ऑक्सीजन सिलेंडर भर रहे हैं बल्कि राज्यों और हॉस्पिटल को सप्लाई भी कर रहे हैं. जिनमें सबसे बड़ा योगदान सरकारी उपक्रम सेल स्‍टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी सेल (SAIL) का है. जिनके भिलाई, दुर्गापुर, बोकारो, राउरकेला, बर्नपुर में लगातार मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन और सप्लाई बढ़ती जा रही है. एक अनुमान के मुताबिक सेल से मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई हर रोज 800 टन तक जा पहुंची है. जानकारी के लिए बात दें कि पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस 22 अप्रैल को विजाग से 100 टन लिक्विड मेडिकल ऑक्‍सीजन लेकर महाराष्ट्र पहुंची थी.

धर्मेन्द्र प्रधान पेट्रोलियम मंत्री भी हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय भी इस रेस में पीछे नहीं है. तेल क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में देश भर में 93 स्थानों पर प्रेशर स्विंग अब्सॉर्प्शन मेडिकल ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट्स स्थापित करने की शुरुआत कर दी गई है. इनसे हॉस्पिटलों को ऑक्सीजन की सप्लाई और अपने पास उपलब्ध ऑक्सीजन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.


आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश मे मेडिकल ऑक्सीजन का रोज का उत्पादन 7100-7200 मीट्रिक टन है. जिसमें धर्मेन्द्र प्रधान के दोनों मंत्रालयों का योगदान 4000 मीट्रिक टन से ज्यादा है. जाहिर है धर्मेन्द्र प्रधान के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है जिसे पूरा करने में वो जी जान से लगे हुए हैं. धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में दोनों मंत्रालयों के बीच समन्वय भी हो रहा है और काम में तेजी भी आ रही है. लक्ष्य एक ही है कि पीएम मोदी के आह्वान के बाद इस ऑक्सीजन संकट से देश को जल्दी से जल्दी उबारा जा सके.
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