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तूफान से भी ज्‍यादा मुश्किल है आंधी की चेतावनी: मौसम विभाग

प्रिया गौतम | News18Hindi
Updated: May 30, 2018, 5:23 PM IST

मौसम विभाग की भाषा में आंधी और तूफान में जमीन आसमान का अंतर है जबकि लोगों का मानना है कि आंधी तूफान एक ही चीज होती है.

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2 मई से लेकर 15 तक और फिर एक बार 29 मई को आई भीषण आपदा ने सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. राजस्‍थान से लेकर उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्‍ली-एनसीआर और उत्‍तराखंड सहित पूरे उत्‍तर भारत को हिला देने वाली इस घटना को कहीं आंधी तो कहीं तूफान कहा जा रहा है लेकिन वास्‍तव में उत्‍तर भारत में तांडव मचा रही यह आपदा सिर्फ आंधी है न कि तूफान.

आपको लग रहा होगा कि आंधी और तूफान तो एक ही चीज है. अमूमन लोगों का मानना भी है कि आंधी तूफान में कोई अंतर नहीं होता है लेकिन मौसम विभाग की भाषा में आंधी और तूफान में जमीन आसमान का अंतर है. इतना ही नहीं तूफान की चेतावनी कई दिन पहले जारी कर देने वाले मौसम विभाग को आंधी की चेतावनी देने में काफी मुश्किलें आती हैं.

प्रादेशिक मौसम केंद्र नई दिल्‍ली के मौसम वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्‍तव बताते हैं कि आंधी और तूफान एकदम अलग-अलग चीजें हैं. तूफान या चक्रवाती तूफान प्री मानसून और पोस्‍ट मानसून सीजन में आते हैं. ये मुख्‍य रूप से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनते हैं. वहीं आंध्रप्रदेश, उड़ीसा अौर पश्चिम बंगाल सहित अन्‍य समुद्री इलाकों को प्रभावित करते हैं.



cyclon- file photo




तूफान का आकार काफी बड़ा होता है. यह करीब 300 किलोमीटर से लेकर 1000 किलोमीटर तक फैला होता है. तूफान के सेंटर के आसपास का करीब 250 किलोमीटर का इलाका सबसे ज्‍यादा नुकसान झेलता है. तूफान तेज हवा और बारिश के साथ गोल-गोल घूमता हुआ आगे बढ़ता है. यह समुद्र के आसपास बसे शहरों में दर्जनों किलोमीटर तक अंदर घुस जाता है और भारी तबाही मचाता है.

Cyclone Ockhi Weakens Into Depression Says IMD
cyclon, ockhi file photo (source:AP)


मौसम विभाग समय-समय पर तूफानों की चेतावनी जारी करता है. श्रीवास्‍तव कहते हैं कि तूफानों की चेतावनी जारी करना सरल है क्‍योंकि तूफानों को लेकर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर काफी रिसर्च की जा चुकी है. सेटेलाइट के द्वारा भी काफी डेटा इकठ्ठा किया जा चुका है.

श्रीवास्‍तव ब‍ताते हैं कि आंधी तूफान से पूरी तरह अलग चीज है. पिछले कुछ दिनों से उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों में हाहाकार मचा रही आपदा आंधी है न कि तूफान. मैदानी भागों में हल्‍की बूंदाबांदी, तेज बादलों का गर्जन और बिजली की चमक के साथ आगे बढ़ने वाली तेज गर्म हवाएं आंधी हैं. आंधी का तूफान की तरह कोई केंद्र नहीं होता. यह लोकल स्‍तर पर भी पैदा हो सकती है. यह करीब आधे से एक घंटे की तेज गतिविधि होती है जो लगातार आगे बढ़ती जाती है.

धूल भरी आंधी; प्रतीकात्मक फोटो


प्री मानसून सीजन में और खासतौर पर मई-जून में आंधी का प्रकोप ज्‍यादा देखने को मिलता है. पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के गर्म तापमान के संपर्क में आने से आंधी पैदा होती है. इंटेसिटी ज्यादा होने के कारण यह काफी नुकसान करती है. मौसम में बदलाव के साथ ही आंधी इतनी जल्‍दी जन्‍म लेती है कि मौसम विभाग भी इसकी चेतावनी कई दिन पहले नहीं कर सकता.

वैज्ञानिक कुलदीप कहते हैं कि आंधी की चेतावनी ज्यादा से ज्‍यादा 4 या 5 घंटे पहले ही दी जा सकती है. इसकी मुख्‍य वजह यह है कि आंधी को लेकर विश्‍व भर में कम रिसर्च हुए हैं जबकि चक्रवाती तूफानों को लेकर काफी शोध किए गए हैं. आंधी की जानकारी इसलिए भी मुश्किल है कि कोने-कोने में सेटेलाइट और रडार से जानकारी हासिल करने का सिस्‍टम अभी हर जगह नहीं है. जबकि समुद्री इलाकों में किसी भी गतिविधि को तत्‍काल पकड़ने के लिए सिस्‍टम की पूरी व्‍यवस्‍था कर दी गई है.

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First published: May 30, 2018, 3:17 PM IST
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