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ये है जेएनयू से नजीब के गायब होने की कहानी, ऐसे उठा तूफान

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: October 20, 2016, 3:19 PM IST
ये है जेएनयू से नजीब के गायब होने की कहानी, ऐसे उठा तूफान
हॉस्टल यूनियन चुनाव को लेकर एबीवीवी नेता और गायब छात्र नजीब अहमद के बीच 14 अक्टूबर की रात हुआ था विवाद।

हॉस्टल यूनियन चुनाव को लेकर एबीवीवी नेता और गायब छात्र नजीब अहमद के बीच 14 अक्टूबर की रात हुआ था विवाद।

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नई दिल्‍ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से गायब एमएससी (बायोटेक्‍नोलॉजी) प्रथम वर्ष के छात्र नजीब अहमद को लेकर कैंपस का माहौल गर्म है। इसी के बहाने एक बार फिर यहां लाल और भगवा ब्रिगेड आमने-सामने हैं। लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्र प्रशासनिक भवन के सामने धरने पर बैठ गए हैं। पूरे प्रकरण में वह वीसी को भी कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

इस मामले में हो रही छात्र राजनीति के बीच जानते हैं कि पूरा प्रकरण क्‍या है। उत्‍तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला नजीब यहां के मावी-मांडवी हॉस्‍टल के रूम नंबर 106 में रहता है। इस समय जेएनयू में हॉस्‍टल यूनियन का चुनाव चल रहा है। इसी हॉस्‍टल में मेस सचिव पद के लिए खड़ा विक्रांत यादव 14 अक्‍टूबर की रात नजीब के कमरे में प्रचार के लिए आया था।

इसी दौरान दोनों में कहासुनी हुई। एबीवीपी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दौरान नजीब अहमद ने विक्रांत को दो झापड़ जड़ दिए। इसके बाद विक्रांत ने छात्र संघ के कुछ पदाधिकारियों को बुला लिया। दोनों पक्षों में सुलह की कोशिश की गई। दरअसल, ये हॉस्टल यूनियन पर कब्जे की ही लड़ाई है जो अब इस स्तर तक पहुंच गई है।  इस हॉस्‍टल के एक गार्ड ने भी बताया 14 तारीख की रात प्रचार को लेकर हंगामा हुआ था।

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जेएनयू में राष्‍ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोपी रहे उमर खालिद का कहना है कि 27 वर्षीय नजीब अहमद को विक्रांत यादव द्वारा बुलाकर लाई गई भीड़ ने पीटा। इसके बाद 15 तारीख की सुबह से उसका पता नहीं है। नजीब अहमद के रूममेट मोहम्‍मद कासिम हैं। इस हॉस्‍टल में करीब दो सौ कमरे हैं।

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परिजनों की शिकायत पर बसंत कुंज थाना पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया है। लेकिन छात्र संगठन का कहना है कि वीसी को खुद भी एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए, वह इस मामले में बेहद लापरवाह हैं। अपनी जिम्‍मेदारी से भाग रहे हैं इसलिए लेफ्ट संगठनों के छात्रों ने प्रशासनिक भवन के सामने धरना शुरू कर दिया है।
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उमर का कहना है कि इससे पहले कभी भी जेएनयू कैंपस में ऐसा नहीं हुआ। सब सिर्फ विचारों की लड़ाई लड़ते हैं। जो भी आरोपी छात्र हैं उन्‍हें हॉस्‍टल से बाहर करके मामले की जांच करनी चाहिए। उधर, इस मामले में एबीवीपी नेता का नाम आने से भगवा ब्रिगेड के लिए परेशानी बढ़ गई है। जेएनयू के पूर्व ज्‍वाइंट सेक्रेटरी और एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा का कहना है कि पुलिस नजीब को खोजने में लापरवाही न करे। वह चाहते हैं कि नजीब जहां भी है, वापस आए।

यहां का माहौल ऐसा तो नहीं था कभी

जेएनयू छात्र संघ ने हमेशा से विचाराधारा की लड़ाई लड़ी है। यहां हाथापाई तक की नौबत नहीं आती। यहां अन्‍य शैक्षणिक संस्‍थानों के मुकाबले माहौल काफी खुला और सहज है। छात्र संघ चुनाव में सभी लेफ्ट संगठन एक थे। एबीवीपी को कैंपस से बाहर करने का उनका लक्ष्‍य था। दोनों पक्ष एक दूसरे के सामने उनके खिलाफ खूब नारे लगा रहे थे, लेकिन किसी में कोई कहासुनी नहीं हो रही थी। ऐसे माहौल में एक छात्र का गायब हो जाना जेएनयू  में नए तूफान की ओर संकेत कर रहा है।

 

 

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First published: October 20, 2016, 2:14 PM IST
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