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युवराज की तरह इन्होंने भी कैंसर को किया जिंदगी से 'आउट', आज पूरे कर रहे अपने सपने

युवराज की तरह इन्होंने भी कैंसर को किया जिंदगी से 'आउट', आज पूरे कर रहे अपने सपने

Photo: AP

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कैंसर को मात देकर उबरे युवराज सिंह आज गेंदबाजों के लिए खौफ का पर्याय बन गये हैं. क्रिकेटर युवराज की तरह ऐसे कई लोग हैं जो कैंसर को हराकर आज सामान्य जीवन जी रहे हैं.

    कैंसर को मात देकर क्रिकेटर युवराज सिंह ने खेल के मैदान में फिर से अपनी बादशाहत कायम की है. कटक में खेली गई 150 रनों की धुआंधार पारी इस बात की गवाह है. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से उबर कर फिर से अपनी पुरानी लय में आना किसी के लिए भी आसान नहीं होता है.

    भारत-इंगलैड के बीच दूसरे वनडे में युवराज सिंह की धमाकेदार बल्लेबाजी की हर ओर चर्चा हो रही है. कैंसर को मात देकर उबरे युवराज सिंह अब गेंदबाजों के लिए खौफ का पर्याय बन गए हैं. क्रिकेटर युवराज की तरह ऐसे कई लोग हैं जो कैंसर को हराकर आज सामान्य जीवन जी रहे हैं.

    राजस्थान के 'युवराज' 19 की उम्र में दे चुके हैं कैंसर को मात

    युवराज की वापसी के बाद सौरभ भी अपने दोस्तों और करीबी लोगों के बीच 'युवराज' के नाम से पुकारा जाने लगे हैं. उल्लेखनीय है कि धुआंधार बल्लेबाजी के लिए मशहूर क्रिकेटर युवराज सिंह को कैंसर से उबरे अभी ज़्यादा वक्त नहीं बीता है और गुरुवार को ही उन्होंने अपने वनडे करियर का सबसे बेहतरीन स्कोर (150 रन) खड़ा कर दिखाया.  ये है सौरभ की कहानी.

    सौरभ अग्रवाल
    सौरभ अग्रवाल


    सौरभ जयपुर के बनीपार्क का रहने वाला है. सामान्य परिवार में जन्मे सौरभ को महज 19 साल की उम्र में कैंसर हो गया था. कैंसर सौरभ के लिए सिर्फ मर्ज नहीं था वो करीब एक साल तक तनाव, अवसाद, पीड़ा और दु:खों का वो समय था जब वे अपनी पढ़ाई, खेल-कूद सब भूल गए थे.

    स्कूल की पढ़ाई खत्म कर कॉलेज जीवन की दहलीज पर कैंसर ने उन्हें ऐसा जकड़ा की वो बेहद उदास रहने लगे, लेकिन ये उदासी और निराशा कुछ दिनों-महीनों तक ही हावी रही.

    परिवार के प्यार, मां के दुलार और बहन के ख्याल के साथ पापा और दादा की हौसला अफजाई ने सौरभ के मन में नया जोश भर दिया. और एक साल तक ऑपरेशन, कीमोथेरेपी के दर्दभरे इलाज के बाद आखिर वो कैंसर को मात देने में सफल रहे.

    घुटने में दर्द निकला कैंसर

    सौरभ को कैंसर का पता अप्रैल 2011 में चला, उसके घुटने में दर्द रहने लगा था. चैकअप करवाया तो ट्यूमर निकला और कैंसर के अंदेशे पर मुंबई पहुंचे, वहां जांच के बाद कैंसर बता दिया गया. उस समय बी.कॉम की परीक्षाएं भी थी और उस पर ये कैंसर का भय. आखिर उसी महीने मुंबई में पहली कीमोथेरेपी लेकर पास जयपुर लौट आए.

    बच्चों को देखा तो एहसास हुआ, जो मिला है कम नहीं

    सौरभ ने बताया कि वह कैंसर का नाम सुनकर ही हताश हो गया था. मन शंकाओं से भरा था और जीवन में सब कुछ हार जाने वाले भाव पैदा हो रहे थे. लेकिन मुंबई के टाटा मैमोरियल अस्पताल में जब छोटे-छोटे बच्चों को कैंसर से लड़ाई लड़ते देख मुझे एहसास हुआ कि जो मैंने पाया है वो कम नहीं है. उन बच्चों ने तो 19 बसंत भी नहीं देखे थे. तभी से मेरे मन से कैंसर को लेकर डर कम होने लगा.

    माता-पिता को बहन ने संभाला

    सौरभ के अनुसार मुंबई से लौटने के बाद जयपुर में दो कीमोथेरेपी ली और फिर वापस मुंबई में ऑपरेशन के लिए जाना पड़ा. ऑपरेशन सफल रहा लेकिन उसके बाद भी 6 बार कीमोथेरेपी लेनी पड़ी. वे कहते हैं कि बाल झड़ गए थे और मैं दर्द से बुरी तरह टूट चुका था.

    मेरी हालत देख मम्मी-पापा भी काफी परेशान हो गए थे, लेकिन ऐसे वक्त मेरी बहन सुरभि ने मुझे हिम्मत देने के साथ-साथ मम्मी-पापा को भी संभाला. ये इस लिए महत्वपूर्ण है क्यों कि वो तब महज 6-7वीं क्लास की स्टूडेंट थी.

    दादा बने परिवार का संबंल

    कैंसर का इलाज जितना पीड़ा देता है उतरा ही आर्थिक रूप से भी कमजोर कर देता है. सौरभ बताते हैं कि मेरे इलाज में करीब 30-35 लाख रुपए खर्च हो गए और ऐसे में मेरे दादा ने परिवार को न सिर्फ मानसिक बल्कि आर्थिक संबल भी दिया.

    जिद्द से मिला जीवन

    युवराज की धुंआधार बल्लेबाजी वाली वापसी पर बात करते हुए सौरभ बताते हैं कि युवी ने भी दिखा दिया है कि जीवन में जिसने हार मान ली वह कभी वापसी नहीं कर सकता. वे बताते हैं कि मैं कैंसर के बाद पूरी तरह से निराश हो गया था लेकिन आखिर परिवार के सपोर्ट और खुद पर हुए लाखों रुपए ने मुझे नया लक्ष्य दिया.

    मैंने ठान लिया कि मुझ पर परिवार ने इतना पैसा खर्च किया है और सभी मानसिक रूप से परेशान रहे हैं तो उन्हें अब और दु:खी नहीं होने दूंगा. मैंने ये जिद्द कर ली कि अब कैंसर को मात देकर रहूंगा. ऐसा ही हुआ भी. रोजाना योग, ध्यान, डॉक्टर के बताई बातों का ख्याल और आत्मविश्वास के दम पर मैं कैंसर को मात दे पाया. जनवरी 2012 में जब चैकअप के लिए मुंबई गया तो मुझे कैंसर सरवाईवल बताया गया.

    खुद तो बच गया अब दूसरों के लिए काम

    आत्मविश्वास के दम पर सौरभ खुद तो कैंसर के मर्ज से बच गए है और अब इसी आत्मविश्वास के जरिए कैंसर पीड़ितों में जीवन की नई किरण बन हौसला भरने का काम कर रहे हैं. सौरभ आज भी नियमित रूप से कैंसर पीड़ितों के बीच पहुंचकर अपनी कैंसर से लड़ाई का उदाहरण पेश कर हौसलअफजाई करते हैं. सौरभ के इस काम में उनके दोस्त आदित्य और सौरभ भल्ला भी सहयोग करते हैं.

    इस युवा क्रिकेटर ने कैंसर से लड़ने के बाद दी मात

    क्रिकेटर युवराज सिंह की तरह भोपाल के इस युवा क्रिकेटर ने दो साल तक कैंसर से जूझने के बाद उसे मात दे दी है. कैंसर पर जीत हासिल करने के बाद अब ये खिलाड़ी वापस भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने के अपने सपने को पूरा करने में जुट गया है.

    सिद्धांत
    सिद्धांत


    क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाले भोपाल के सिद्धांत ने अभी अंकुर अकादमी में प्रैक्टिस शुरू ही की थी कि उसके सपनों को बड़ा झटका लग गया. कुछ दिन की प्रैक्टिस के बाद ही मैदान पर खेलते हुए अचानक सिद्धांत की तबीयत बिगड़ गई.

    जब तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया. डाक्टर ने टेस्ट के बाद उसे हाज्किंज लिम्फोमा लिम्फ नोड कैंसर होने की बात बतायी. रिपोर्ट सामने आने के बाद सिद्धांत के साथ उनकी दादी की भी मानों पैरों तले जमीन खिसक गई.

    आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से सिद्धांत का इलाज सही तरीके से करवाना दादी विद्यादेवी के लिए बड़ी चुनौती बन गई. उन्होंने हार नहीं मानी और इलाज के लिए प्रशासन से लेकर निजी तौर पर आर्थिक सहायता बटोरते हुए उन्होंने लगातार अपने पोते की कीमोथैरेपी करवाई.

    दादी की हिम्मत ने सिद्धांत के इरादों को भी जिंदा रखा और आखिरकार दो साल बाद उसने न सिर्फ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात दी बल्कि क्रिकेट के मैदान पर भी वापसी की.

    डेढ़ साल से दोबारा क्रिकेट के मैदान में नजर आ रहे सिद्धांत ने बताया कि उनका सपना भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना है. इसके लिए वो बकायदा अभ्यास भी कर रहे हैं. सिद्धांत को कैंसर को मात देकर मैदान में वापसी करता देख उनके कोच और दोस्त भी खुश है.

    कैंसर को दो बार मात देकर आज संभाल रही करोड़ों का कारोबार

    बिहार के गोपालगंज की हथुआ महारानी पूनम शाही भी एक ऐसी ही शख्सियत हैं. 2001 में पूनम शाही को कैंसर डिटेक्ट हुआ. पटना में उनका मेजर ऑपरेशन हुआ. कैंसर से महारानी पूनम शाही का दोनों ओवरी और यूटरस समेत दूसरे अंग भी प्रभावित हो गए थे. मजबूत इरादे और जीवटता के कारण उन्होंने कैंसर को हराकर सामान्य जीवन व्यतीत करने लगी.

    पूनम साही
    पूनम साही


    महारानी पूनम शाही पर परिवार के साथ साथ पूरे हथुआ एम्पयार की जिम्मेदारी है. इस परिवार का छपरा, पटना, कोलकाता, बनारस और दिल्ली समेत कई शहरों में होटल,रेस्टोरेंट गेस्ट हाउस और दूसरे कारोबार हैं. महारानी खुद इन कामों को संभालती हैं. कैंसर से उबरन के बाद पूनम शाही ने एक बार फिर काम संभाला और सुबह से शाम काम करने लगी. उनके साथ करीब एक हजार लोग काम करते हैं.

    कैंसर से उबरने के बाद महारानी लगातार काम कर रही थी लेकिन इसी बीच 11 साल बाद 2013 में एक बार फिर से उन्हें कैंसर डिटेक्ट हुआ. इस बार स्थिति काफी गंभीर हो गई थी. दिल्ली के नजदीक फरीदाबाद के एक अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया. कई शहरों के बड़े डॉक्टरों ने उनका इलाज किया. पूनम शाही ने एक बार फिर कैंसर को मात देकर स्वस्थ हो गई.

    पति महाराज मृगेंद्र प्रताप शाही के मुताबिक दोनों बार पूनम शाही का कीमियोथैरेपी किया गया. स्थिति काफी खराब हो गई थी लेकिन अपनी जीवटता के कारण आज हमारे बीच में हैं और पूरे एम्पायर का कारोबार और परिवार को संभाल रही हैं. महारानी पूनम शाही आज 63 साल की हैं और बिल्कुल स्वस्थ हैं.

    81 वर्ष की उम्र में भी जीती कैंसर से जंग

    कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो इंसान की हिम्मत तोड़ देती है, लेकिन मन में जज्बा हो तो हारी हुई लड़ाई भी जीती जा सकती है. 81 वर्ष की उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं, लेकिन गुड़गांव की इस महिला ने इस उम्र में न कैंसर से संघर्ष किया बल्कि उसे जीता भी.

    81 वर्षीय पद्मा कपूर को गर्भाषय के कैंसर से पीड़ित पाया गया और उनकी सर्जरी बेहद जटिल थी. इसके साथ उन्हें कई अन्य समस्याएं जैसे हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हृदय संबंधी बीमारियां थी. उनके घुटने का प्रत्यारोपण भी हुआ था. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी औऱ पिछले साल दिसंबर में सर्जरी करवाई, जिसमें उन्होंने कैंसर की इस जंग को जीत लिया.

    पद्मा कपूर
    पद्मा कपूर


    पद्मा कपूर ने बताया कि अगर मन में किसी भी चुनौती को लड़ने की हिम्मत हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं. पद्मा ने बताया, जब उन्हें इस बीमारी का पता चला तो वो काफी सदमें में आ गई औऱ उनका परिवार भी काफी परेशान हो गया. लेकिन उन्होंने और उनके परिवार ने हार नहीं मानी और वो इससे लड़ने के लिए तैयार हो गई.

    उन्होंने बताया आज वो पूरी तरह से फिट है और अपनी जिंदगी अच्छे से गुजार रही हैं और उनका परिवार भी अब काफी खुश है.

    ये हैं यूपी के 'युवराज', कैंसर की जंग जीत अब छेड़ दी उसी के खिलाफ मुहिम

    युवराज जिन्हें समय से कैंसर जैसी बीमारी का पता चला और वर्ल्ड की बेस्ट ट्रीटमेंट मिली, लेकिन आम जिंदगी में भी ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कैंसर के खिलाफ जंग जीती है और आज अपनी जिंदगी ठीक से गुजार रहे हैं. ऐसे ही एक शख्स से बात की न्यूज़18 ने.

    संजोग वाल्टर पेशे से पत्रकार हैं और देश के नामी टीवी चैनलों के लिए काम कर चुके हैं. आजकल वे कैंसर के खिलाफ व्हाट्सएप और फेसबुक पर मुहिम चला रखी है. ये लोगों को पान मसाला और गुटखा न खाने की अपील करते हैं और कहते हैं जान है तो जहान है.

    Sanjog Walter
    Sanjog Walter


    संजोग वाल्टर ने बताया कि शायद उन्हें कैंसर की शुरुआत 2011-12 में ही हो चुकी थी. लेकिन उन्हें पता नहीं चला. जब उन्हें पता चला तब तक कैंसर सेकंड स्टेज में था. वाल्टर बताते हैं कि उनके एक साथी रिपोर्टर की भी मौत 2014 में कैंसर से हुई थी. जब वे उनके परिवार से मिलने पहुंचे तो साथी के शव को देखकर डर गए. इसके बाद उन्होंने पान मसाला खाना बंद कर दिया. लेकिन तब तक उन्हें माउथ कैंसर हो चुका था.

    वाल्टर ने बताया कि जब उन्हें 2014 में इसकी जानकारी हुई तो उनका दिमाग कुछ देरे के लिए शून्य में चला गया. उन्हें सूझ ही नहीं रहा था कि वो क्या करें. वाल्टर से जब घरवालों के रिएक्शन के बारे पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका दिमाग खाली हो चुका था. उन्हें नहीं पता कि उनकी पत्नी, मां और बच्चों के ऊपर उस समय क्या गुजर रही थी.

    वाल्टर ने बताया कि उन्होंने लखनऊ के तीन बेस्ट पैथोलॉजी में टेस्ट करवाया लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव ही आया. इसके बाद सभी लोग अलग-अलग राय दे रहे थे. कोई कहता कलकत्ता जाओ, कोई कहता मुंबई तो कोई कहता पीजीआई. लेकिन उन्होंने अपना ऑपरेशन लखनऊ मेडिकल कॉलेज में करवाया.

    वाल्टर ने बताया कि उनका रेडिएशन या कीमों नहीं हुआ था, जिस वजह से अब वे काफी हद तक ठीक हो चुके हैं.

    वाल्टर भाई का एक मर्म यह भी है कि मीडिया में रहते हुए भी उनके इस कठिन घड़ी में किसी ने उनका साथ नहीं दिया. आज वाल्टर व्हाट्सएप और फेसबुक ग्रुप के जरिये लोगों को पान मसाला खाने से रोकने की मुहीम भी चला रहे हैं. वाल्टर ने कहा कि उन्होंने सैकड़ों लोगों को पान मसाले की लत छुड़वा दी है. वे आगे भी अपने इस मुहिम से जुड़े रहेंगे.

    Tags: Yuvraj singh

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