अंबेडकर ने मनुष्‍य के रूप में जीने का हक दिलाया: डॉ जाधव

मुंबई के वडाला की एक झुग्‍गी से निकलकर देश के जानें-माने अर्थशास्‍त्री तक का सफर तय करने वाले डॉ.नरेंद्र जाधव ने दलित जीवन के यथार्थ को भोगा है. वे इस समय राज्‍यसभा सांसद हैं.

News18Hindi
Updated: April 14, 2017, 10:54 AM IST
अंबेडकर ने मनुष्‍य के रूप में जीने का हक दिलाया: डॉ जाधव
मुंबई के वडाला की एक झुग्‍गी से निकलकर देश के जानें-माने अर्थशास्‍त्री तक का सफर तय करने वाले डॉ.नरेंद्र जाधव ने दलित जीवन के यथार्थ को भोगा है. वे इस समय राज्‍यसभा सांसद हैं.
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Updated: April 14, 2017, 10:54 AM IST

अर्थशास्‍त्री, प्रोफेसर, लेखक, ब्‍यूरोक्रेट और राज्‍यसभा मेंबर नरेंद्र जाधव मुंबई से आते हैं.  दलित जीवन की विडंबनाओं के बीच उन्‍होंने समाज की मुख्‍यधारा में न केवल जगह बनाई बल्‍कि दलित समाज को दिशा भी दी. बौद्ध धर्म अपना चुके जाधव मुंबई के वडाला में पले-बढ़े. अर्थशास्‍त्र से पीएचडी जाधव ने 31 सालों तक रिजर्व बैंक में चीफ इकॉनामिस्‍ट और एडवाइजर के रूप में नौकरी की. वे आईएमएफ में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.  इस समय वे राज्‍यसभा सांसद हैं.


अंबेडकर पर किया है काम
बतौर एक लेखक जाधव ने तकरीबन 100 रिसर्च पेपर और 14 किताबें लिखी हैं. उन्‍होंने ज्‍यादा काम अंबेडकर पर किया है. वे महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा किसान आत्‍महत्‍या को लेकर बनाई गई कमेटी के चैयरमेन भी रहे हैं. पुणे यूनविर्सिटी में वाइस चांसलर रहे जाधव अफगानिस्‍तान और इथोपिया की सरकारों में सलाहकार पदों रह चुके हैं. नीति आयोग के सदस्‍य डॉ.जाधव शिक्षा, श्रम और रोजगार के मामलों को देखते हैं.


आत्‍मकथा में दर्ज है दलित जीवन का संघर्ष

डॉ.जाधव ने दलित जीवन की त्रासदियों को अपने परिवारिक जीवन की आत्‍मकथा में भी दर्ज किया है. मराठी में उनकी यह पुस्‍तक 'आमचा बाप अन आम्‍ही' नाम से प्रकाशित हुई है, जबकि अंग्रेजी में 'अनटचेबल' के नाम से पूरी दुनिया में सर्वाधिक पढ़ी गई किताबों में से एक है. इस किताब का तकरीबन 15 भाषाओं में अनुवाद हुआ है. किताब के जरिये डॉ.जाधव ने दलित समाज के साथ छुआछूत, शोषण उनके उत्‍पीड़न को दर्ज किया है.


झेला है दलित जीवन का दंश
मुंबई के वडाला की एक झुग्‍गी से निकलकर देश के जानें-माने अर्थशास्‍त्री तक का सफर तय करने वाले डॉ.नरेंद्र जाधव ने दलित जीवन के यथार्थ को भोगा है. अपनी आत्‍मकथा की भूमिका जाधव ने बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कीहै. वे कहते हैं कि अंबेडकर ने उन्‍हें मनुष्‍य तौर जीने का अधिकार दिलाया.

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