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NRC से दुखी जुबैदा बेगम की ऐसी है दास्तां, 15 दस्तावेज दिखाने के बाद भी नहीं मिली नागरिकता

News18Hindi
Updated: February 19, 2020, 12:05 PM IST
NRC से दुखी जुबैदा बेगम की ऐसी है दास्तां, 15 दस्तावेज दिखाने के बाद भी नहीं मिली नागरिकता
जुबैदा बेगम की तरह कई लोग लड़ रहे नागरिकता के लिए लड़ाई (फोटो-प्रतीकात्मक)

असम (Assam) के 40 लाख लोगों में शामिल है असम की जुबैदा बेगम (Zubeida Begum) उर्फ जुबैदा खातून का नाम, जिनके 15 दस्तावेज दिखाने के बावजूद नागरिकता नहीं मिली.

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  • Last Updated: February 19, 2020, 12:05 PM IST
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गुवाहाटी. देश में जहां एक ओर CAA और NRC को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग NRC के चलते कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. असम देश का इकलौता राज्य है जहां NRC को लागू किया गया जिसने वहां के 40 से 41 लाख लोगों से उनकी नागरिकता छीन ली. इन्हीं लोगों में शामिल है असम की जुबैदा बेगम उर्फ जुबैदा खातून का नाम, जिनके 15 दस्तावेज दिखाने के बावजूद उन्हें नागरिकता नहीं मिली. जुबैदा ने विदेशी न्यायाधिकरण के खुद को विदेशी घोषित करने के आदेश को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

जुबैदा को भरोसा था कि उन्हें नागरिकता मिल जाएगी लेकिन कई दस्तावेज दिखाने पर गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने कहा है कि फोटो युक्त वोटर आइडेंटिटी कार्ड किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं हो सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि भूमि राजस्व रसीद, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेजों का उपयोग नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता है.

जुबैदा ने अपनी पूरी कमाई लगा दी कानूनी लड़ाई में
जुबैदा गुवाहाटी से लगभग 100 किलोमीटर दूर बक्सा जिले में रहती हैं. उनके पति रज्जाक अली काफी लंबे समय से बीमार चल रहे हैं और इसी कारण 50 साल की जुबैदा अपने परिवार में कमाने वाली एकमात्र हैं. जुबैदा को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उनकी 3 बेटियां थीं जिनमें से एक की मृत्यु दुर्घटना में हो गई थी और एक लड़की लापता हो गई. छोटी बेटी अस्मिना को वो इस उम्मीद में पढ़ा रही हैं कि पढ़-लिख वो हमारी तरह मजदूरी नहीं करेगी.



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सुप्रीम कोर्ट जाने के पैसे नहीं जुबैदा के पास
जुबैदा का कहना है कि उन्होंने जितनी भी कमाई की थी वह सारी नागरिकता पाने के लिए लड़ रही कानूनी लड़ाई में गंवा दी. असम के गोयाबारी गांव की रहने वाली जुबैदा बेगम को ट्रिब्यूनल ने 2018 में विदेशी घोषित कर दिया था. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. गुवाहाटी हाईकोर्ट से जंग हारने के बाद अब उनके पास दूसरा विकल्प सुप्रीम कोर्ट है लेकिन ये उस गरीब की पहुंच से काफी दूर है. उनका कहना है कि मुझे मेरी नहीं अब अपनी बेटी की चिंता है कि मेरे बाद उसका क्या होगा.

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गौरतलब है कि एनआरसी का पहला मसौदा गत 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे. असम सरकार का कहना है कि जिनके नाम रजिस्टर में नहीं हैं उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा.

केंद्र सरकार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया है कि लिस्ट में नाम न होने पर किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और उसे अपनी नागरिकता साबित करने का हरसंभव मौका दिया जाएगा.

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First published: February 19, 2020, 10:51 AM IST
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