पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी लेकिन अगले हफ्ते फिर खराब होगी दिल्ली-एनसीआर की हवा

तस्वीर- News18
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पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई है.

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  • Last Updated: November 17, 2020, 3:30 PM IST
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निखिल घानेकर


नई दिल्ली. पंजाब में साल 2016 के मुकाबले इस बार पराली जलाने के ज्यादा मामले सामने आए. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस साल धान की फसल कटने तक जितनी पराली जलाई गई, ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ. हालांकि बीते हफ्ते इसकी संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है.

पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 16 नवंबर तक पराली जलाए जाने की संख्या 3508 से घटकर अचानक 9 से 10 हो गई. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सोमवार को राज्य में बारिश हुई. पश्चिमी विक्षोभ के चलते हिमाचल प्रदेश में जहां बर्फबारी हुई वहीं पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश हुई.
पराली जलाने की संख्या में गिरावट आई


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक वीके सोनी ने कहा, 'बादलों के चलते सैटेलाइट इमेज की क्लियरिटी में कमी हो सकती है लेकिन पराली जलाने की संख्या में गिरावट आई है.' 22 सितंबर और 16 नवंबर के बीच, अकेले पंजाब में 73,988 पराली जलाने के मामले  दर्ज किए गए. साल 2016 के बाद यह सबसे बड़ी संख्या थी. साल 2016 में राज्य में किसानों ने नवंबर के अंत तक 81,042 जगह पराली जलाई थी.

भारतीय किसान यूनियन के धाकुंडा यूनिट के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, 'पंजाब में खेतों की कटाई और सफाई लगभग 95% हो चुकी है. धान की केवल पूसा किस्म को अभी साफ किया जाना है और यह भी जल्द ही खत्म हो जाएगा.'

PM 2.5, PM 10 ब्लैक कार्बन हवा में घुल जाते हैं
पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने का इस्तेमाल जमीन को गेहूं की फसल को तैयार करने के लिए किया जाता है. जिसके चले PM 2.5, PM 10 ब्लैक कार्बन हवा में घुल जाते हैं. जब हवा उत्तर और उत्तर पश्चिम की ओर बहती है तो यह दिल्ली एनसीआर के साथ-साथ गंगा के मैदानों में भी पहुंच जाते हैं. इसके चलते इन इलाकों में भारी प्रदूषण हो जाता है.

पिछले सोमवार को दिल्ली-एनसीआर बहुत ज्यादा प्रदूषण का सामना किया. इस दौरान दिल्ली के कुछ हिस्सों में सुरक्षित सीमा से 12-15 गुना अधिक पीएम 2.5 का स्तर दर्ज किया. यहां PM 2.5 के कुल तत्वों का 38 फीसदी पराली का हिस्सा था. PM2.5 इंसान के बाल से 30 फीसदी छोटा होता है और फेफड़ों के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है.

पटाखों और स्थानीय प्रदूषण के बाद भी हवाओं और बारिश के चलते वीकेंड में दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है. मंगलवार को शहर का AQI 'मध्यम' श्रेणी में था. हालांकि केंद्र के SAFAR (सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि हवा की गुणवत्ता बुधवार तक धीरे-धीरे खराब श्रेणी में आने की संभावना है और सप्ताह के अंत तक बहुत खराब श्रेणी में आ सकती है.
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