छात्रा ने 150 घंटों में चावल के 4042 दानों पर लिखी भगवद् गीता, बगैर मैग्निफाइंग ग्लास के बनाती हैं माइक्रो आर्ट

स्वारिका पिछले चार सालों से माइक्रो आर्ट पर काम कर रही हैं। वह चावल पर भगवान गणेश का चित्र भी बना चुकी हैं।
स्वारिका पिछले चार सालों से माइक्रो आर्ट पर काम कर रही हैं। वह चावल पर भगवान गणेश का चित्र भी बना चुकी हैं।

हैदराबाद में रहने वाली रामागिरी स्वारिका लॉ स्टूडेंट और जानी-मानी माइक्रो आर्टिस्ट (Micro Artist) हैं. स्वारिका अब तक 2000 से ज्यादा माइक्रो आर्ट पर काम कर चुकी हैं. माइक्रो आर्ट के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 1:50 PM IST
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हैदराबाद की एक छात्रा ने चावलों पर भागवत गीता लिखने का कारनामा कर दिखाया है. कानून की पढ़ाई कर रहीं रामागिरी स्वारिका (Ramagiri Swarika) ने चावल के 4,042 दानों पर गीता लिखी है. इस काम को स्वारिका ने अपने नए माइक्रो आर्ट प्रोजेक्ट के तहत किया है, जिसमें उन्हें करीब 150 घंटों का समय लगा. स्वारिका को माइक्रो आर्ट के चलते कई बार सम्मानित किया जा चुका है.

नहीं करतीं मैग्निफाइंग ग्लास का इस्तेमाल
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में स्वारिका ने कहा "मेरे नए काम में मैंने चावल के 4,042 दानों पर भागवत गीता लिखी है, जिसे पूरा होने में 150 घंटों का समय लगा. मैं माइक्रो आर्ट्स बनाने के लिए कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हूं." उन्होंने कहा कि यह नया प्रोजेक्ट उनके पुराने 2000 कलाओं के संग्रह में शामिल होने जा रहा है.

खास बात है कि स्वारिका इस काम में मैग्निफाइंग ग्लास (Magnifying Glass) का इस्तेमाल नहीं करतीं. इसके अलावा उन्होंने दूध, कागज और सीसम के बीज की मदद से भी कलाकारी की है.
बालों पर लिखी थी भारतीय संविधान की प्रस्तावना


स्वारिका ने बीते वर्ष 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस (National Law Day) मनाने के लिए बालों पर संविधान की प्रस्तावना (Preamble of the Constitution) लिखी थी. इसके लिए उन्होंने पहले बालों की किस्मों को इकट्ठा किया और बाद में उन्हें चिपका दिया. इसके बाद उन्होंने इस पर पतले ब्रश और सफेद पेंट की मदद से लिखा. स्वारिका बताती हैं कि उन्हें इस काम के लिए तेलंगाना की गवर्नर तमिलिसाई सुंदरराजन (Governor Tamilisai Soundararajan) ने सम्मानित भी किया था.

इसके अलावा उन्हें नॉर्थ दिल्ली कल्चरल एकेडमी (North Delhi Cultural Academy) की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जा चुका है. उन्होंने कहा "मुझे 2017 और 2019 में इंटरनेशनल ऑर्डर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का अवॉर्ड मिला, मुझे नॉर्थ दिल्ली कल्चरल एकेडमी की तरफ से राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया." उन्होंने बताया "मैं अब तक 2000 से ज्यादा माइक्रो आर्ट पर काम कर चुकी हूं."

जज बनना चाहती हैं स्वारिका
स्वारिका ने एएनआई को बताया "मुझे हमेशा से ही आर्ट और म्यूजिक में दिलचस्पी रही थी और बचपन से लेकर अब तक कई अवॉर्ड जीते हैं. मैंने माइक्रो आर्ट की शुरुआत चार साल पहले चावल के दाने पर भगवान गणेश (Lord Ganesha) का चित्र बनाकर की थी. इसके बाद चावल के एक दाने पर अंग्रेजी के पूरे अल्फाबेट लिखे." स्वारिका आगे चलकर जज और महिलाओं के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं.


क्या है माइक्रो आर्ट?

बीते कुछ सालों में माइक्रो आर्ट काफी पॉपुलर हुई है. इस आर्ट के तहत कलाकार छोटी छोटी चीजों जैसे- दाल, चावल के दानों पर कलाकृतियां बनाते हैं. कुछ सालों पहले केरल के आर्टिस्ट थॉमस जैकब (Thomas Jacob) को उनकी आर्ट के लिए सोशल मीडिया पर काफी प्रशंसा मिली थी. थॉमस ने केरल के मछुआरों की छोटी-छोटी कलाकृतियां तैयार की थीं. इसके जरिए उन्होंने बाढ़ में सैकड़ों लोगों की जान बचाने वाले मछुआरों का सम्मान किया था.
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