पढ़ाई का जूनून: 3 किलोमीटर पहाड़ की चढ़ाई कर स्टूडेंट्स अटेंड करते हैं ऑनलाइन क्लास

गोवा में स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लास के लिए चढ़ना पड़ता है पहाड़ (प्रतीकात्मक तस्वीर)
गोवा में स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लास के लिए चढ़ना पड़ता है पहाड़ (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस (Coronavirus)ने हमारी जिन्दगी को नई चुनौतियों से घेर लिया है. स्कूल जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह एक बड़ी समस्या बन गया है. ऑनलाइन क्लासेज के विकल्प तो हैं लेकिन किसी के पास इंटरनेट नहीं है तो किसी के पास डिवाइस नहीं है. इन्हीं चुनौतियों के बीच कईयों ने नए रास्ते खोजे हैं.

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पणजी. कोविड-19 (Coronavirus) महामारी के दौरान भी पढ़ाई जारी रखने का जुनून ही है जो गोवा (Goa) के छात्रों का एक समूह ऑनलाइन क्लास करने के लिए हर रोज तीन किलोमीटर की चढ़ाई करके पहाड़ी पर पहुंचता है क्योंकि वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित इस पहाड़ी पर इंटरनेट कनेक्टिविटी अच्छी मिलती है. इस समूह में 25 छात्र हैं जिनमें कई लड़कियां भी हैं. बीते कई महीनों से उनकी दिनचर्या में शामिल है दक्षिण गोवा जिले के संगम तालुका में पहाड़ी पर चढ़ाई करना. इसमें जो खतरे हैं उनसे भी उनका हौसला नहीं डिगता.

कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के चलते तटीय राज्य में शैक्षणिक संस्थान मार्च से ही बंद हैं और यहां भी शिक्षण ऑनलाइन ही हो रहा है. संगम तालुका के कुमारी और पात्रे जैसे गांव पणजी के दक्षिण में करीब 100 किमी की दूरी पर स्थित हैं. यहां के छात्र नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य में कुमार पहाड़ी पर नियमित तौर पर तीन किलोमीटर की चढ़ाई करते हैं क्योंकि यहां पर उनके मोबाइल फोन पर सिग्नल अच्छे मिलते हैं और ऑनलाइन क्लास करना संभव हो पाता है.

हम सुबह करीब आठ बजे यहां आते हैं- नीलिमा
एक छात्रा नीलिमा एकदो ने बताया, ‘हम सुबह करीब आठ बजे यहां आते हैं और दोपहर एक बजे तक कक्षाएं होने के बाद घर लौटते हैं.’ नीलिमा इंजीनियरिंग की छात्रा है. प्रविता गांवकर कॉलेज में पढ़ती हैं, वह कहती हैं कि यहां कई बार उनका सांपों से सामना हो जाता है. लेकिन ऑनलाइन क्लास करने के लिए यहां आना उनकी मजबूरी है.



जिला प्रशासन से जब इस बारे में पूछा गया तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रयास किए जा रहे हैं कि इलाके में बीएसएनएल के सभी टॉवर सुचारू रूप से काम करें. उन्होंने यह भी कहा कि खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण छात्रों को जो परेशानियां आ रही हैं उनके बारे में जिला कलेक्ट्रेट में हुई बैठकों में बात भी की गई है.
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