छात्रों का दावा- क्वारंटाइन के बाद कहा- घर लौटने का इंतजाम खुद करो, टैक्सी वाले मांग रहे 60 हजार रुपए

छात्रों का दावा- क्वारंटाइन के बाद कहा- घर लौटने का इंतजाम खुद करो, टैक्सी वाले मांग रहे 60 हजार रुपए
मिन्हाज ने बताया कि टैक्सी वाला उसे जैसलमेर से बंगाल पहुंचाने का किराया 60 हजार मांग रहा है.

मार्च में ईरान से 457 भारतीयों को एयरलिफ्ट कर स्वदेश लाया गया. इन सभी को जैसलमेर में आर्मी की देखरेख में क्वारंटाइन किया गया. फिर बंगाल और बिहार के छात्रों को खुद के खर्च पर जाने को कहा गया.

  • News18India
  • Last Updated: April 25, 2020, 3:00 PM IST
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नई दिल्ली. जानलेवा कोरोना वायरस (Coronavirus) सिर्फ उन लोगों के लिए परेशानी का सबब नहीं है, जो इससे संक्रमित हैं. इसने उन लोगों के लिए भी मुश्किलें खड़ी की हैं, जो इस वायरस के संदिग्ध मरीज हैं. ऐसे 457 संदिग्धों को राजस्थान के जैसलमेर (Jaisalmer) में क्वारंटाइन किया गया था. इनमें बंगाल के छात्र मिन्हाज आलम और बिहार के मोहम्मद भी शामिल हैं. क्वारंटाइन का वक्त खत्म होने के बाद इन दोनों को अपने खर्चे पर घर लौटने को कह दिया गया. घर लौटने की खबर तो अच्छी थी, लेकिन लॉकडाउन में जाएं कैसे. इस समस्या ने इन दोनों छात्रों के होश उड़ा दिए.

बंगाल के मिन्हाज आलम ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह ईरान (Iran) से स्वदेश एयरलिफ्ट किए गए जत्थे में शामिल था. ईरान से मार्च में 457 लोगों को स्वदेश लाया गया था. इन सभी को जैसलमेर में आर्मी की देखरेख में क्वारंटाइन किया गया. इनमें से ज्यादातर श्रीनगर और लद्दाख के लोग थे. इन सभी को उनके घर लौटने का इंतजाम कर दिया गया. लेकिन उसे कहा गया कि वह अपने घर लौटने का इंतजाम खुद कर ले. इस बारे में उसके घरवालों को भी फोन कर दिया गया. 15 मार्च को क्वारंटाइन किए गए मिन्हाज के चार टेस्ट किए गए. सभी टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आई.

मिन्हाज तेहरान की एक यूनिवर्सिटी में मास्टर डिग्री कर रहा है. उसने कहा कि यहां से बंगाल 2000 किलोमीटर है. लॉकडाउन में आने-जाने के साधन बंद हैं. प्राइवेट टैक्सी वाला 60 हजार रुपए मांग रहा है. ऐसे में उसका घर लौटना मुश्किल हो गया है. मिन्हाज यह भी कहते हैं, ‘कश्मीर के श्रद्धालुओं को उनके घर जाने का इंतजाम कर दिया. लेकिन मुझे अपने खर्च पर जाने को कहा जा रहा है. यह कैसा भेदभाव है. मेरी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है. मैं तो स्कॉलरशिप की बदौलत पढ़ाई कर पा रहा हूं.’ मुजफ्फरपुर के मोहम्मद को भी अपने खर्च पर घर लौटने को कहा गया है.



रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल संबित घोष ने इस बारे में कहा कि उन्हें क्वारंटाइन सेंटर के इंतजाम देखने को कहा गया है. उनकी जिम्मेदारी सिर्फ क्वारंटाइन सेंटर की है. इसके बाद लोगों को घर भेजने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है. जब इस में गृह मंत्रालय की प्रवक्ता वसुधा गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
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