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पाकिस्‍तान के स्‍टूडेंट्स ने कहा- 'हमें JNU में नजर आती है अपनी झलक'

News18Hindi
Updated: November 27, 2019, 3:03 PM IST
पाकिस्‍तान के स्‍टूडेंट्स ने कहा- 'हमें JNU में नजर आती है अपनी झलक'
पाकिस्‍तान के छात्र शुक्रवार को एकसाथ 50 जगह छात्र एकजुटता मार्च निकालने की तैयार कर रहे हैं. उनका कहना है कि जेएनयू हमारी प्रेरणा है.

लाहौर (Lahore) का प्रोग्रेसिव स्‍टूडेंट्स फेडरेशन (PRSF) शुक्रवार को पाकिस्‍तान (Pakistan) में 50 जगहों पर 'छात्र एकजुटता मार्च' की तैयारी कर रहा है. सिंध यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि हमने कैंपस में साफ पानी की मांग की तो विश्‍वविद्यालय प्रशासन ने हमें आतंकवादी (Terrorist) बता दिया. यूनिवर्सिटी प्रशासन के तानाशही रवैया का विरोध करने पर हमें जेल में डाल दिया गया. हम इसी के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 3:03 PM IST
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उदय सिंह राणा

नई दिल्‍ली. जेएनयू के प्रशासनिक ब्‍लॉक के सामने नवंबर में फैज अहमद फैज के शब्‍द 'हम देखेंगे, लाजिम है कि हम भी देखेंगे' गूंजे थे, तो लाहौर की सड़कों पर उतरे छात्र राम प्रसाद बिस्मिल के शब्‍द 'सरफारोशी की तमन्‍ना' गूंज रहे हैं. वहीं, हॉन्‍ग कॉन्‍ग (Hong Kong) में भी छात्र सड़क पर उतरकर सत्‍ता का विरोध कर रहे हैं. पूरे एशिया (Asia) में वाम रुझान (Left Leaned) वाले प्रोग्रेसिव स्‍टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं. छात्र नारे लगा रहे हैं, 'सुर्ख होगा, सुर्ख होगा - एशिया सुर्ख होगा!' भारत, पाकिस्‍तान (Pakistan) और हॉन्‍ग कॉन्‍ग के छात्रों की प्रशासन से झड़पों की खबरें हर दिन मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं. दिल्‍ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र फीस वृद्धि के खिलाफ सड़क पर उतरे. इसी तरह पाकिस्‍तान के वाम रुझान वाले छात्र भी पूरे देश में बड़े स्‍तर पर विरोध की तैयारी कर रहे हैं.

पीआरएसएफ एक साथ 50 जगह निकालेगा छात्र एकजुटता मार्च
लाहौर का प्रोग्रेसिव स्‍टूडेंट्स फेडरेशन (PRSF) पाकिस्‍तान की 50 जगहों पर शुक्रवार को एकसाथ 'छात्र एकजुटता मार्च' निकालने की तैयारियों में जुटा है. पिछले साल भी इसी तरह का एक छात्र आंदोलन छेड़ा गया था, लेकिन उसका ज्‍यादा असर नहीं हुआ. हालांकि, तब से अब तक काफी कुछ बदल चुका है. सिंध (Sindh) प्रांत में हिंदू डेंटल स्‍टूडेंट डॉ. निमृता कुमारी की हत्‍या कर दी गई. इसके बाद बलूचिस्‍तान यूनिवर्सिटी (Balochistan University) को एक छात्र के उत्‍पीड़न के मामले ने हिलाकर रख दिया. छात्रों के गुस्‍से के कारण वाइस चासंलर (VC) को हटा दिया गया. इस्‍लामाबाद में भी एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को निकालकर हॉस्‍टल सील कर दिए गए. हाल में सिंध यूनिवर्सिटी में पानी की कमी का विरोध कर रहे 17 छात्रों पर देशद्रोह (Sedition) के आरोप में मामला दर्ज कर दिया गया.

'हम सम्‍मान के साथ जीने के अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं'
कॉलेजों में सरकार के कथित हस्तक्षेप, फीस वृद्धि (Fee Hike) और छात्रावास की कमी के खिलाफ निकाला जा रहा मार्च पाकिस्तान में छात्र राजनीति के लिहाज से बहुत ही संवेदनशील मौका है. पीएसआरएफ ने ट्वीट किया, 'हम साफ पानी की मांग पर आतंकी करार दिए जाने के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं. हम प्रशासन के तानाशाही रवैये के विरोध पर जेल में डाल दिए जाने के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं. हम सम्‍मान के साथ जीने के अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं.' पीएसआरएफ के केंद्रीय आयोजक हैदर कलीम ने कहा, 'जब हम फैज, बिस्मिल, हबीब जलीब या फहमीदा रियाज की बात करते हैं तो हम उनके असली वारिस हैं.' यह संयोग नहीं है कि सीमा के दोनों तरफ के छात्र 'लाल सलाम' से लेकर 'सरफारोशी की तमन्‍ना' तक एकसुर में गा रहे हैं. हैदर ने कहा कि हमें जेएनयू में अपनी झलक नजर आती है.

पाकिस्‍तान के सैन्‍य तानाशाह जिया उल हक ने व्हिप के जरिये देश के सभी छात्र संगठनों पर पाबंदी लगाई तो पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो ने सत्‍ता में आने के बाद पाबंदियां हटा दी थीं.
'JNU वो चिंगारी है, जो पूरे एशिया के छात्रों को देती है उम्‍मीद'
हैदर ने कहा कि जेएनयू वो चिंगारी है, जो पूरे एशिया में छात्र आंदोलन को उम्‍मीद देती है. जेएनयू एशियाई छात्रों को अन्‍याय के खिलाफ चाड़े होने और सत्‍ता के खिलाफ लड़ने की उम्‍मीद देती है. पाकिस्‍तान में जून, 2019 के बाद छात्रों में उबाल आया. हालांकि, हैदर कलीम के मुताबिक इसकी शुरुआत काफी पहले से हो चुकी थी. छात्रों को फीस वृद्धि, बजट में कटौती और उत्‍पीड़न के बढ़ते मामलों के खिलाफ सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ा. ये हो सकता है कि ये सभी मुद्दे अब सबसे ऊपर नजर आ रहे हैं, लेकिन ये वर्षों से छात्रों को परेशान कर रहे थे. सिंध में छात्रों पर देशद्रोह के मामले थोप दिए गए. उनका अपराध साफ पानी की मांग था. कलीम ने कहा कि जेएनयू में छात्र संगठनों की एकजुटतमा के कारण फीस कम है. यहां तक कि भारत की सरकार को उनकी बात सुननी ही पड़ती है.

हक ने लगाई पाबंदी, तो भुट्टो ने फिर खड़े कर दिए छात्र संगठन
हैदर कलीम ने कहा, 'सवाल ये है कि सभी जगह फीस कम क्‍यों नहीं हो सकती? अगर हम जेएनयू की तरह डटकर खड़े हो जाएं तो हम भी पाकिस्‍तान में सस्‍ती शिक्षा हासिल कर सकते हैं.' कलीम ने बताया कि पाकिस्‍तान में सरकार सुनियोजित तरीके से छात्र संगठनों को खत्‍म करने पर तुली है. हमारी मांग है कि छात्र संगठनों को फिर खड़ा किया जाए. पाकिस्‍तान के सैन्‍य तानाशाह जिया उल हक ने 1984 में एक व्हिप जारी कर छात्र संगठनों और विश्‍वविद्यालय परिसरों में सियासी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. हक ने छात्रों की राय, चर्चा और असहमति को दबा दिया. इसके बाद पाकिस्‍तान की पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो ने 1989 में छात्र संगठनों को फिर खड़ा किया. जब एक कोर्ट ने 1993 में दिए अपने आदेश में छात्र संगछनों को संवैधानिक बताते हुए फिर खड़ा करने को कहा तो छात्र राजनीति के फिर जिंदा होने की उम्‍मीद बढ़ गई.

कोर्ट के आदेश के 26 साल बाद भी नेता नहीं ले पाएं हैं फैसला
कलीम ने कहा कि कोर्ट के आदेश के 26 साल भी सियासी पार्टियां अब तक उस पर अमल नहीं कर पाई हैं. यहां तक कि छात्रों को पाकिस्‍तान के कॉलेजों में प्रवेश से पहले ही एक हलफनामे पर हस्‍ताक्षर करने होते हैं. इसमें लिखा होता है कि हम कैंपस में किसी भी तरह की राजनीति में सक्रिय नहीं रहेंगे. वे हमें कैंपस में असली लोकतंत्र नहीं देना चाहते हैं. छात्र इस हलफनामे को खत्‍म करने की मांग भी कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि जब-जब सरकार समाजवादी संगठनों को दबाती है तब-तब फासीवादी और धार्मिक चरमपंथी छात्र संगठनों को उभरने का पूरा मौका दिया जाता है. उन्‍होंने बताया कि पाकिस्‍तान के छात्र 2016 में जेएनयू छात्र संगठन अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार के मामले पर नजर बनाए हुए थे. जेएनयू ने हमें अहसास कराया कि हम साथ खड़े हों तो जीत सकते हैं.

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First published: November 27, 2019, 3:03 PM IST
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