सावधान! बेबी डायपर में मिलें टॉक्सिक, बच्चों की सेहत के लिए है बहुत हानिकारक

सांकेतिक तस्वीर
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Diapers Danger for baby health: वाट्स इन द डायपर : प्रेसेंस ऑफ थैलेट्स इन बेबी डायपर्स शीर्षक से जारी इस अध्ययन रिपोर्ट में बाजार में उपलब्ध डिस्पोजेबल बेबी डायपर में विषैले थैलेट्स्स (रसायन व प्लास्टिक के अंश) पाए जाने पर चिंता व्यक्त की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 5:48 PM IST
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नई दिल्ली. मॉर्डन लाइफस्टाइल में बच्चों को डायपर (Baby diapers) पहनना बहुत ही आम है. डायपर पेरेंट्स के लिए बेशक काफी सुविधाजनक चीज हो, लेकिन ये बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक (Diapers Danger for baby health) साबित हो सकता है. पिछले दिनों पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन टॉक्सिक लिंक द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि डायपर में खतरनाक रसायनों और प्लास्टिक के अंश होते हैं.

वाट्स इन द डायपर : प्रेसेंस ऑफ थैलेट्स इन बेबी डायपर्स शीर्षक से जारी इस अध्ययन रिपोर्ट में बाजार में उपलब्ध डिस्पोजेबल बेबी डायपर में विषैले थैलेट्स्स (रसायन व प्लास्टिक के अंश) पाए जाने पर चिंता व्यक्त की गई है. इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ये थैलेट्स, अंत:स्रावी रसायनों की कार्यप्रणाली में व्यवधान उत्पन्न कर स्वास्थ्य को गंभीर हानि पहुंचाते हैं. खास बात है कि ये सिर्फ छोटी कंपनियों के डायपर में ही नहीं बल्कि नामी कंपनियों के बनाए डायपर में भी मौजूद होते हैं.

डीईएचपी की मात्रा भी डायपर में मिली
इस अध्ययन के दौरान डायपर में 2.36 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से लेकर 302.25 पीपीएम तक थैलेट्स की अत्यधिक मात्र पाई गई. यहां ये जानना जरूरी है कि डीईएचपी सबसे खतरनाकर थैलेट्स माना जाता है. कई बेबी प्रोडक्ट्स में इसका उपयोग करना प्रतिबंधित है. इसके बावजूद डायपर में इसकी मात्रा 2.36 पीपीएम से 264.94 पीपीएम के बीच पाई गई.
टॉक्सिक्स लिंक की कार्यक्रम समन्वयक अलका दुबे ने कहा कि अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि किसी भी डायपर बनाने वाली कंपनी ने अपने पैकेट पर उपयोग किए जाने वाले अवयवों और रसायनों को प्रदर्शित नहीं किया है. उन्होंने कहा कि वो बच्चों के डायपर निर्माण के लिए उचित दिशा-निर्देश लाने के लिए केंद्र सरकार के संबंधित विभाग से संपर्क करेंगी.



क्या है थैलेट्स और क्यों है ये खतरनाक?
थैलेट्स एक किस्म का केमिकल्स होता है. इसका इस्तेमाल प्लास्टिक को फ्लेक्सिबल, ड्यूरेबल, सॉफ्ट और ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए किया जाता है. डायपर में थैलेट्स होना बच्चों के लिए काफी खतरनाक है, क्योंकि जब बच्चे इसे पहनते हैं तो ये नमी पाकर डायपर से मुक्त हो जाते हैं और उनकी स्किन से कॉन्टैक्ट में आ जाते हैं.

अध्ययन में यह बात सामने आई है कि स्किन से थैलेट्स का ज्यादा संपर्क होने से किडनी/लंग्स की दिक्कत, कैंसर, रीप्रोडक्टिव सिस्टम में दिक्कत, फर्टिलिटी इश्यूज़, न्यूरो डेवलपमेंट इश्यू, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, डायबिटीज़ और ऑटिज़्म जैसी खतरनाक बीमारियां बच्चों को हो सकती हैं.
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