बिल नहीं, इन 4 तरीकों से वापस आएगा काला धन!

वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कालेधन पर सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।

श्रवण शुक्‍ला
Updated: October 15, 2015, 8:14 PM IST
बिल नहीं, इन 4 तरीकों से वापस आएगा काला धन!
वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कालेधन पर सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।
श्रवण शुक्‍ला
श्रवण शुक्‍ला
Updated: October 15, 2015, 8:14 PM IST
नई दिल्ली। एक तरफ संसद में ब्लैक मनी बिल पारित होने पर मोदी सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस बिल को विदेशों में जमा काला धन वापस लाने के लिहाज से बिल्कुल निरर्थक करार दिया है। स्वामी ने ये भी दावा किया कि केंद्र सरकार कालेधन को वापस लाने की गंभीर पहल नहीं कर रही, और न ही उसकी ऐसी मंशा दिखती है।

स्वामी ने आईबीएनखबर से बातचीत में कहा कि सरकार ने कालेधन को लेकर जो बिल पास कराया है, वो ‘अपर्याप्त’ ताकतों वाला है। उससे कुछ हासिल नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि मैं सरकार के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन हमने कालेधन को लाने का वादा किया था। मुझसे लोग पूछते हैं कि क्या हुआ हमारे 15 लाख का? मैं जमीन पर रहकर काम करता हूं, इसीलिए लोगों के सवाल भी मैं ही झेलता हूं।

स्वामी ने कहा कि नए बिल का ताल्लुक वैध कमाई पर न चुकाए गए टैक्स से है। मनी लांड्रिंग या दूसरे अपराधों से हासिल रकम के मामले में इस कानून से काम नहीं चलेगा। काला धन वापस लाने के चार तरीके हैं और वे ये तरीके मोदी सरकार को लिखित में बता चुके हैं।



पहला तरीकाः सुब्रमण्यम स्वामी ने काला धन वापस लाने के पहले तरीके के रूप में लेटर रॉगिटरी का सुझाव दिया है। इसमें कालेधन के संभावित आरोपियों पर देश में एफआईआर दर्ज कराने के बाद विदेशी न्यायालय को पत्र लिखा जाता है। जिसके बाद विदेशी न्यायालय उस देश के कानून के मुताबिक सरकार को निर्देश देकर काम कराती है। इस प्रक्रिया में कूटनीति का भी अहम किरदार होता है। जिसकी वजह से इसमें काफी समय लग जाता है। हालांकि, ये पूरी तरह से सुरक्षित और भरोसेमंद प्रक्रिया होती है।

दूसरा तरीकाः सुब्रमण्यम स्वामी का दूसरा तरीका विवादित हो सकता है। इसमें उन्होंने फ्रांस और जर्मनी की सरकारों के काम करने के तरीके अपनाने की बात कही है। इस तरह ब्लैक मनी के संभावित आरोपियों तक पहुंचने के लिए सरकार को ही अवैध काम करना होगा। जिसमें भ्रष्ट बैंक अधिकारियों से मिलकर कालाधन रखने वालों की लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है। भारत में कालेधन पर मचे बवाल के पीछे जो लिस्ट है, वो इसी तरीके से प्राप्त की गई थी।

तीसरा तरीकाः स्वामी ने कालेधन को वापस पाने के लिए तीसरे तरीके के रूप में अमेरिकी तकनीक अपनाने की सलाह दी है। इसमें सरकार को अध्यादेश या कानून पास करना होता है कि कालाधन रखने वाले राष्ट्रविरोधी हैं। इसी तरह के कानून के तहत अमेरिका ने स्विस बैंक के अधिकारियों को देश विरोधी कृत्यों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद स्विस सरकार के दानकारी देने पर उन्हें रिहा किया गया।

चौथा तरीकाः स्वामी ने जो चौथा तरीका सरकार को सुझाया है, उसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर कानून बनाने की बात कही है। इसके अनुसार सरकार को अधिकार है कि वो एक अध्यादेश पास करे, जिसके तहत टैक्स हैवेन देशों या सीक्रेट बैंकिंग की सुविधा वाले 90 देशों में जमा भारतीयों के धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दे और पूरे धन को वापस लाए। इस दौरान बातचीत में सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि उनकी गणना के मुताबिक विदेशों में भारतीयों के 120 लाख करोड़ से अधिक का काला धन मौजूद है।
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स्वामी ने कहा कि ये 120 लाख करोड़ रुपये पूरे देश के एक साल के आयकर का 60 गुणा अधिक है जो कि देश की किस्मत बदल सकता है। गौरतलब है कि स्वामी के साथ ही बीजेपी के निष्कासित नेता और जाने माने वकील राम जेठमलानी ने भी सुप्रीम कोर्ट में काले धन के मुद्दे पर सरकार को घेरा था। उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू वाली बेंच के सामने कहा कि मौजूदा सरकार काले धन को वापस लाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है। जेठमलानी ने इसे आम जनता से सरकार का धोखा करार दिया था। जेठमलानी ने सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर उस याचिका पर बहस के दौरान ये बात कही, जिसमें स्वामी ने सरकार और कालेधन पर गठित एसआईटी को कालेधन को लाने के लिए उक्त सुझाव दिए थे। इस दौरान एसआईटी ने कालेधन पर तीसरी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।
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