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स्वामी विवेकानंद जी से जुड़ी है पूर्ण स्वराज की परिकल्पना : सुधांशु त्रिवेदी

राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस मौके पर लेख प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को भी पुरस्कृत किया. (News 18)

राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस मौके पर लेख प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को भी पुरस्कृत किया. (News 18)

राज्यसभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने रामकृष्ण मिशन आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपना पूरा जीवन देश और समाज को दिया. उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा का जो विपुल ज्ञान दिया, उसके बाद पूरी दुनिया की नजर भारत पर पड़ी.

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नई दिल्ली. राज्यसभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में साल 1905 में लोकमान्य तिलक जी के पूर्ण स्वराज की मांग से शुरू होती है. अपने विचार में लोकमान्य तिलक ने कहा कि उनके पूर्ण स्वराज की मांग के पीछे स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का शक्तिपुंज है. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने दुनिया के मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा का जो विपुल ज्ञान दिया, जिसके बाद पूरी दुनिया की नजर भारत पर पड़ी. स्वामी जी के शिकागो धर्म संसद से भारत की मनीषा को अखिल जगत ने स्वीकार किया.

दिल्ली के रामकृष्ण मिशन आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में सांसद डॉक्टर त्रिवेदी ने कहा, ‘स्वामी जी ने अपना पूरा जीवन देश और समाज को दिया. स्वामी विवेकानंद ने वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा का जो विपुल ज्ञान दिया, उसके बाद पूरी दुनिया की नजर भारत पर पड़ी.’ इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के आजादी के अमृत महोत्सव के संदर्भ में किया गया. इस अवसर पर कई छात्रों को सम्मानित भी किया गया.

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रामकृष्ण मिशन के दिल्ली आश्रम की ओर से गत 7 मई को एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें एनसीआर के कई कॉलेज के छात्रों ने हिस्सा लिया था. निबंध का विषय था – स्वामी विवेकानंद और भारत की आजादी. रामकृष्ण मिशन दिल्ली के सचिव स्वामी शांतात्मानंद जी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का बेहद योगदान रहा है. कई राष्ट्रीय नेताओं ने इनके बताए रास्ते और विचारों का अनुसरण किया. उनका मिशन रहा कि देश को सर्वश्रेष्ठ स्थान पर ले जाया जाए.

उन्होंने बताया कि रामकृष्ण मिशन समय समय पर इस प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन कराती रहती है. चूंकि, देश इस समय आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है, इसलिए स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को आज के युवाओं तक पहुंचाने के लिए इस विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया.

स्वामी शांतात्मानंद जी ने बताया कि  स्वामी विवेकानंद के विचार पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है. व्यक्ति के चरित्र निर्माण और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए उन्होंने कई बातें कहीं हैं. हम समय समय पर कई  प्रकार के कार्यक्रम करते रहते हैं, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी होती है.

इस बीच लेख प्रतियोगिता के विजयी छात्रों को पुरस्कृत किया गया जिनमें आदित्य कुमार (रामजस कॉलेज) को प्रथम पुरस्कार के तौर पर 10 हजार रुपये मिले. अंबर टिक्कू (राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय) को द्वितीय पुरस्कार 7500 रुपये) जबकि आर्यमा सना (एमिटी यूनिवर्सिटी) को तृतीय पुरस्कार 5000 रुपये) मिले.

Tags: Delhi latest news, Ramakrishna Paramahamsa, Sudhanshu Trivedi, Swami vivekananda

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