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किसान बोले 'गाय नहीं गन्ना', चीनी मिलों पर बकाया हैं किसानों के 12,810 करोड़ रुपये

फाइल फोटो.

फाइल फोटो.

2018 के कैराना उपचुनाव में पश्चिमी यूपी के किसानों ने 'जिन्ना नहीं गन्ना' का नारा दिया. अब 11 अप्रैल को पश्चिमी यूपी में पहले चरण का मतदान है. इससे पहले एक बार फिर गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को उठाते हुए 'गाय नहीं गन्ना' का नारा दिया है.

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    2018 के कैराना उपचुनाव में पश्चिमी यूपी के किसानों ने 'जिन्ना नहीं गन्ना' का नारा दिया. उस वक्त अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद चल रहा था. अब 11 अप्रैल को पश्चिमी यूपी में लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण का मतदान है. इससे पहले एक बार फिर गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को उठाते हुए 'गाय नहीं गन्ना' का नारा दिया है.

    गन्ना किसानों की ये नाराज़गी बेवजह नहीं है. स्टेट एडवाइजरी प्राइस के अनुसार 22 मार्च तक यूपी के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर करीब 12 हजार 810 करोड़ रुपये बकाया है. शामली के रहने वाले कृषि के जानकार और किसान शुभम मलिक बताते हैं,  '22 मार्च तक गन्ना किसानों का सभी सरकारी-प्राइवेट चीनी मिलों पर इस वर्ष 2018-19 के 12550 करोड़ रुपये बकाया हैं. जबकि सरकार कहती है कि अगर किसान को गन्ने का भुगतान देरी से किया जाता है तो 14 दिन बाद से ही उसे लेट भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान भी किया जाएगा. लेकिन 14 दिन तो छोड़िए गन्ना किसानों के वर्ष 2017-18 238 करोड़ और वर्ष 2016-17 के 22 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है.'

    वहीं अपने चुनावी कार्यक्रम के दौरान प्रियंका गांधी ने भी गन्ना किसानों के बकाए का मामला उठाते हुए कहा कि इस बार किसानों का 10 हजार करोड़ रुपये बाकी हैं, जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा है.

    वहीं भारतीय किसान यूनियन के अनिल मलिक भानु कहते हैं, 'असल में गन्ना किसानों के बकाया के लिए सरकार से ज्यादा उनके संगठन जिम्मेदार हैं. ये लोग किसानों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं. जब सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत होती है तो ऐसे लोग व्यक्तिगत फायदा उठा रहे होते हैं. आज की तारीख में किसानों का करीब 13 हजार करोड़ रुपये बकाया है.'

    उधर इस बारे में डिप्टी केन कमिश्नर स्टेटिक्स आरएन यादव का कहना है, 'हम लोग रोजाना 200 से 300 करोड़ रुपये गन्ने का भुगतान किसानों को कर रहे हैं.'

    गन्ना भुगतान से प्रभावित ज़िले और वहां कब होने हैं चुनाव


    पहला चरण- बागपत, बिजनौर, गाज़ियाबाद, मेरठ, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, शामली

    दूसरा चरण- अलीगढ़, बुलंदशहर, जेपी नगर

    तीसरा चरण- बरेली, बदायूं, कासगंज, मुरादाबाद, पीलीभीत, रामपुर, सम्भल

    चौथा चरण- हरदोई, लखीमपुर, शाहजहांपुर

    पांचवा चरण- बहराइच, बाराबंकी, फैजाबाद, गोण्डा, सीतापुर

    छठा चरण- आज़मगढ़, बलरामपुर, बस्ती, सुल्तानपुर

    सातवां चरण- देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, गोरखपुर

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