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सुनील जाखड़ की केसी वेणुगोपाल को लिखी चिट्ठी से पंजाब कांग्रेस के लिए खड़ी हो सकती है नई परेशानी

सुनील जाखड़ की तरफ से यह पत्र जमीन मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर लिखा गया था. (फाइल फोटो)

सुनील जाखड़ की तरफ से यह पत्र जमीन मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर लिखा गया था. (फाइल फोटो)

Punjab Double Compensation Case: पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) का AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) के नाम लिखा खत पार्टी के लिए नई परेशानी का सबब बन रहा है. इस पत्र में जाखड़ ने कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (Rana Gurmit Singh Sodhi) को पार्टी से हटाने की मांग की है.

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    चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) में कांग्रेस एक के बाद एक विवाद में उलझती जा रही है. अब पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) का AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) के नाम लिखा खत पार्टी के लिए नई परेशानी का सबब बन रहा है. अध्यक्ष पद पर रहते हुए लिखे इस पत्र में जाखड़ ने कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (Rana Gurmit Singh Sodhi) को पार्टी से हटाने की मांग की है. साथ ही ही उन्होंने सोढ़ी पर कांग्रेस के साथ भितरघात के आरोप लगाए हैं. जाखड़ की तरफ से यह पत्र जमीन मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर लिखा गया था.

    पत्र में क्या है?
    इस पत्र में पंजाब सरकार की तरफ से सोढ़ी के खिलाफ 1.83 करोड़ रुपये की वसूली के लिए मुकदमा दायर करने की बात कही गई है. इसके अलावा विभाग ने सोढ़ी और उनके परिवार को खिलाफ ‘राज्य के साथ धोखा’ करने के लिए आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने वसूली की रकम को महज ‘छोटा और शुरुआती हिस्सा’ बताया है.

    जाखड़ ने पत्र में आरोप लगाया है कि सोढ़ी ने ‘पिछली शिअद-भाजपा सरकार के समर्थन से तथ्यों को छिपाकर और गलत तरीके से पेश कर’ यह ‘दोहरा मुआवजा’ हासिल किया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सोढ़ी को नोटिस दिया है.

    क्या है दोहरे मुआवजे का मामला
    सोढ़ी की 11 एकड़ जमीन को पहली बार पीडब्ल्युडी ने 1962 में अधिग्रहित किया था. इसके बाद 2013 उनकी जमीन का अधिग्रहण हुआ. 1962 और 2014 में ही उन्हें सरकार की तरफ से मुआवजा दिया गया था. इसके बाद उन्होंने नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 77 करोड़ रुपये के मुआवजे की तीसरी बार मांग की. यह मामला राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नजर में आया.  उन्होंने ही इसके खिलाफ जांच के आदेश दिए थे.

    जाखड़ को क्या है डर?
    पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि अगर अदालत ने सोढ़ी के पक्ष में फैसला सुना दिया, तो यह कांग्रेस की छवि और आगामी चुनाव को बहुत नुकसान पहुंचाएगा. उन्होंने कहा कि संगरूर और पटरान इलाके के किसान मुआवजे की राशि को 40 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर 70 लाख रुपये करने के लिए विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी जमीन दिल्ली-कर्ता हाईवे के लिए अधिग्रहित की जा रही है. जाखड़ को लगता है कि मोहन के उत्तर गांव में सोढ़ी की जमीन की तुलना में संगरूर बेल्ट ज्यादा महंगा क्षेत्र है.

    उन्होंने अपने पत्र में सवाल किया कि लिंक रोड के पास इस जमीन की मौजूदा कलेक्टर दर 6 लाख 72 हजार 300 रुपये प्रति एकड़ है. अगर सोढ़ी 7 करोड़ रुपये प्रति एकड़ हासिल करने में सफल हो जाते हैं, तो पंजाब का कौन सा किसान इससे कम कीमत में अपनी जमीन अधिग्रहित करने देने के लिए राजी होगा.

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    अकाली दल का नाम शामिल क्यों किया गया
    जाखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि मामला सार्वजनिक होने के बाद भी अकाली दल ने इसका विरोध नहीं किया. साथ ही उन्होंने कहा कि दोहरे मुआवजे का मामला 2007 और 2017 में सामने आया और उस दौरान अकाली सत्ता में थे. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि सुखबीर बादल के कहने पर ही पीडब्ल्युडी ने इस बात को नजरअंदाज किया कि 1962 में जमीन का अधिग्रहण हुआ था और 31 जनवरी 1962 को अधिसूचनाएं भी जारी की गई थीं. इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल किया है कि शिअद और बीजेपी ने क्यों नियमों से अलग हटकर सोढ़ी की मदद की. उन्होंने 2015 में सोढ़ी को डिस्टिलरी लाइसेंस दिए जाने का मुद्दा भी उठाया है.

    कांग्रेस के बीच ताजा विवाद में भी सक्रिय रहे हैं सोढ़ी
    कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद में सोढ़ी ने कैप्टन के संकटमोचक की भूमिका निभाई थी. फिलहाल, सोढ़ी की तरफ से इस पत्र को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सोढ़ी के करीबियों के हवाले से लिखा गया है कि यह पत्र ‘अमरिंदर सिंह को कमजोर’ करने के लिए ‘सीएम विरोधी लॉबी’ का एक प्रयास है. क्योंकि उन्होंने तनाव के बीच सीएम का साथ दिया था.

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