अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने की समझौते की पुष्टि, कहा- अच्छी चीजों में कभी देर नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता समिति ने बुधवार को न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट सौंपी.

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) मध्यस्थता समिति (Supreme Court-appointed mediation panel) की ओर से सौंपी रिपोर्ट के बारे में सूत्रों का दावा है कि 'हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच ‘‘एक तरह का समझौता’’ है.'

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    नई दिल्ली. राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या भूमि विवाद मामले (Ayodhya land dispute case) में मुस्लिम पक्षकारों में से एक सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) के वकील ने पुष्टि की है कि मध्यस्थता पैनल ( Supreme Court-appointed mediation panel) के माध्यम से हिंदू पक्षों को एक समझौता प्रस्ताव पेश किया गया था.

    News18 ने बुधवार को रिपोर्ट दी थी कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (Ram Janmbhoomi-Babri Masjid land dispute ) को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  (Supreme Court) द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल ने एक सील कवर में एक रिपोर्ट दायर की थी, जिसमें सूत्रों ने कहा था कि "कुछ हिंदू और मुस्लिम पक्षकार के बीच समझौता था.'

    मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता शाहिद रिजवी ने News18 को बताया, 'अगर आप उन कामों को करना चाहते हैं, जो कभी नहीं कर सकते हैं, तो आप उन्हें अंतिम समय में भी कर सकते हैं. अदालत के बाहर, मध्यस्थता समिति के समक्ष दोनों पक्षों ने अपनी राय रख दी है और कुछ शर्तों पर एक मत हैं, जिनका मैं अभी खुलासा नहीं कर सकता.'

    CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ ने बुधवार को 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. बुधवार सुबह दाखिल की गई पैनल की रिपोर्ट को बेंच पर चर्चा की. हालांकि इस चर्चा में दोनों पक्ष शामिल नहीं किए गए.

    फैसले से पहले समझौता?
    चूंकि भूमि विवाद का मामला सिविल है ना कि आपराधिक, इसलिए फैसले की घोषणा होने से पहले कभी भी समझौता किया जा सकता. चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में फैसला इस तारीख से पहले आएगा.

    मध्यस्थता पैनल के करीबी सूत्रों ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के अलावा, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, राम जन्मभूमि पुनरूद्धार समिति और कुछ अन्य हिंदू पक्ष विवादास्पद भूमि विवाद को निपटाने के पक्ष में हैं.

    हालांकि, दो मुख्य वादी - वीएचपी समर्थित राम जन्मभूमि न्यास और राम लला देवता और छह अन्य मुस्लिम पक्षों ने अपील दायर की है जो प्रस्तावित "बंदोबस्त" के पक्ष में नहीं हैं.

    क्या है मध्यस्थता पैनल
    मध्यस्थता समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला कर रहे हैं और इसमें आध्यात्मिक गुरु तथा आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रख्यात मध्यस्थ श्रीराम पंचू शामिल हैं.

    सूत्रों ने बताया कि पक्षकारों ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के तहत समझौता करने की मांग की है जिसमें कहा गया है कि मंदिरों के विध्वंस के बाद बनी और 1947 की तरह अब मौजूद मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थानों के संबंध में कोई विवाद नहीं है.

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