लाइव टीवी

क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में 5 एकड़ जमीन दी

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 7:26 PM IST
क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में 5 एकड़ जमीन दी
वक्फ बोर्ड दरअसल एक कानूनी निकाय है

अयोध्या मामले (Ayodhya Land Dispute) में शियाओं ने भी अपना दावा किया था. उनका कहना था कि मीर बाकी शिया (Mir Baqi) था और शिया की बनाई गई मस्जिद (masjid) कायदे से सुन्नी मुस्लिमों (sunni muslim) को नहीं दी जानी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2019, 7:26 PM IST
  • Share this:
अयोध्या मामले में आज, शनिवार 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन राममंदिर के नाम की, साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में कहीं भी 5 एकड़ जमीन देने के लिए कहा गया है. अब इस मामले में सबकी आंखें सुन्नी वक्फ बोर्ड पर लगी हुई हैं कि वो क्या करेगा और कहां मस्जिद निर्माण होगा. आइए जानें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड क्या है.

क्फ बोर्ड दरअसल एक कानूनी निकाय है. इसका गठन साल 1964 में सरकार ने वक्फ कानून 1954 के तहत किया था. इस वक्फ एक्ट के मुताबिक वक्फ के मायने हैं कि इस्लाम पर यकीन रखने वाला कोई व्यक्ति अपनी चल या अचल संपत्ति का किसी खास मकसद के लिए उपयोग कर रहा हो. ये मकसद पूरी तरह से ऐसा हो जिसे इस्लामी कानून के तहत धार्मिक या पवित्र की मान्यता मिली हो.



वक्फ बोर्ड के बनने का मकसद देश में इस्लामिक इमारतों, संस्थानों और जमीनों के रखरखाव और उसके इस्तेमाल को देखना था. इस संस्था में एक अध्यक्ष और बतौर सदस्य 20 लोग होते हैं. इन लोगों की केंद्र सरकार नियुक्त करती है. भारत के प्रत्येक राज्य में अलग-अलग वक्फ बोर्ड है. फिलहाल देशभर में 28 राज्यों/यूनियन टेरिटरी में कुल 30 वक्फ बोर्ड हैं. कुछ राज्यों जैसे गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और दमन-दीव में कोई वक्फ बोर्ड नहीं. जम्मू-कश्मीर में भी Waqf Act 1995 लागू नहीं है.

प्राइवेट वक्फ प्रॉपर्टी किसी की भी हो सकती है (प्रतीकात्मक फोटो)


वैसे वक्फ बोर्ड 2 प्रकार का होता है- पब्लिक और प्राइवेट. इस वक्फ से होने वाला अतिरिक्त मुनाफा आर्थिक रूप से कमजोर तबके में बांट दिया जाता है. दूसरी ओर प्राइवेट वक्फ प्रॉपर्टी किसी की भी हो सकती है. वक्फ प्रमाणीकरण अधिनियम 1913 के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए प्राइवेट वक्फ बना सकता है.

कोई भी वक्फ नहीं बना सकता, बल्कि इसका हक केवल मुस्लिम धर्म मानने वालों के पास है. कोई भी मुस्लिम शख्स वसीयत बनाकर अपनी संपत्ति दान कर सकता है. लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि दानकर्ता व्यस्क होना चाहिए साथ ही दिमागी तौर पर स्वस्थ भी होना जरूरी है. जब कोई अपनी प्रॉपर्टी के डोनेशन की सार्वजनिक घोषणा करता है तो उसे वक्फ के लिए माना जाता है. डेथबेड पर आखिरी सांसें ले रहा शख्स भी ये दान कर सकता है लेकिन तब वक्फ के लिए अपनी पूरी प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि एक तिहाई हिस्सा ही दान कर सकते है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि आखिरी वक्त पर कई बार किसी खास भावना के अतिरेक में लिए फैसले परिवार के साथ नाइंसाफी हो सकते हैं.
Loading...

अयोध्या मामले में शियाओं ने भी अपना दावा किया था


वक्फ में कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे चल-अचल संपत्ति, कंपनियों के शेयर, किताबें, पैसे, जमीनें , जेवर आदि. जब किसी प्रॉपर्टी को अनिश्चित समय के लिए चैरिटेबल मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो इसे वक्फ से जुड़ा मान लिया जाता है. ऐसी प्रॉपर्टी के दान की अलग से घोषणा की जरूरत नहीं होती है.

दिलचस्प बात ये है कि अयोध्या मामले में शियाओं ने भी अपना दावा किया था. उनका कहना था कि मीर बाकी शिया (Mir Baqi) था और शिया की बनाई गई मस्जिद कायदे से सुन्नी मुस्लिमों को नहीं दी जानी चाहिए. बोर्ड के वकील के अनुसार 1946 तक विवादित जमीन पर शियाओं का कब्जा था लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया. फैसले के दौरान बाकी पक्षों पर राय रखते हुए जजों की 5 सदस्यीय समिति ने शिया बोर्ड की अपील खारिज करते हुए कहा कि ये वक्त theology में जाने का नहीं है.



ये भी पढ़ें:

अयोध्या पर नेहरू ने तब जो कहा था, आज हू-ब-हू वही हो रहा है

अक्षय कुमार ने दिल्ली आने के लिए पूरी ट्रेन को ही किया बुक, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 9, 2019, 1:19 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...