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Ranchi News: पीने की बात छोड़िए, नहाने लायक भी नहीं बचा रांची के कांके डैम का पानी, लोगों ने उठाए गंभीर सवाल

रांची की 20 फीसद आबादी की प्यास बुझाने वाले कांके डैम की पेयजल सप्लाई पर सवाल उठे हैं. यह मानकों पर खरा नहीं है. लोगों ने कहा है कि डैम से सप्लाई होने वाला पानी पीने के लायक तो छोडिय़े नहाने लायक भी नहीं है.

रांची की 20 फीसद आबादी की प्यास बुझाने वाले कांके डैम की पेयजल सप्लाई पर सवाल उठे हैं. यह मानकों पर खरा नहीं है. लोगों ने कहा है कि डैम से सप्लाई होने वाला पानी पीने के लायक तो छोडिय़े नहाने लायक भी नहीं है.

रांची की 20 फीसद आबादी की प्यास बुझाने वाले कांके डैम की पेयजल सप्लाई पर सवाल उठे हैं. यह मानकों पर खरा नहीं है. लोगों ने कहा है कि डैम से सप्लाई होने वाला पानी पीने के लायक तो छोड़ि‍ए नहाने लायक भी नहीं है.

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रांची. राजधानी रांची ( Ranchi ) की तकरीबन 20 प्रतिशत आबादी पेयजल के लिए जिस डैम पर निर्भर है उससे होने वाली वॉटर सप्लाई ( Water Supply ) पर ही सवाल उठने लगे हैं. जलापूर्ति करने वाले कांके डैम ( Kanke Dam ) से सप्लाई होने वाली पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता और उसके मानकों को शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं माना जा रहा है. लोगों का कहना है कि सप्लाई होने वाला पानी इस्तेमाल करने लायक नजर नहीं आ रहा है, जबकि डैम प्रशासन के अपने ही तकनीकी तर्क हैं. वह दूषित होने के दावों पर कहीं पाइप फूटने से नाली का पानी प्रवेश कर जाने की बात तो कुबूल करता है, लेकिन इसके बाद भी अपनी वॉटर सप्लाई को शुद्ध और मानकों के अनुरूप बता रहा है.

दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची की 20 फीसदी आबादी कांके डैम के भरोसे ही निर्भर है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से कांके डैम से जलापूर्ति किए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. कांके रोड के कई मुहल्लों और कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने डैम की वॉटर सप्लाई की गुणवत्ता को सही नहीं माना है. उनकी मानें तो सप्लाई किया जाने वाला पानी कहीं से भी पीने लायक नहीं है. उसका पीएच मानक से काफी नीचे है.

जानकारी के अनुसार कांके डैम से ही कांके रोड के बड़े इलाके, रातू रोड, राजभवन, अपर बाजार, और मोरहाबादी समेत कई इलाकों में जलापूर्ति की जाती है. इन इलाकों में दूषित जलापूर्ति से परेशान लोगों ने अपने घरों पर ही सप्लाई वॉटर के पीएच मानक का टेस्ट कर शुद्ध जलापूर्ति के दावों की पोल खोलदी है. डैम के करीब ही बसे मुहल्ले वासियों की मानें तो जलापूर्ति से मिलने वाला पेयजल को पीना तो दूर नहाने के लायक भी वह नहीं है. रांची के सीएमपीडीआई में रहने वाले बलराम जयसवाल बकायदा अपने घर पर पीएच मान टेस्ट कर कांके डैम से की गई जलापूर्ति को दूषित होने का दावा करते हैं. उनकी मानें तो वर्तमान में सप्लाई किया जाने वाला पानी का पीएच 3.4 के करीब है. जो पीने लायक तो दूर नहाने के लिए भी मानक के अनुरूप नहीं है.



कांके डैम के प्लांट इंचार्ज नागेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि डैम से बिल्कुल शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जा रही है, लेकिन रास्ते में कई जगह पाइप लाइन में समस्या है जहां से नाली का पानी पाइप में प्रवेश कर जा रहा है .वहीं केमिस्ट संदीप डैम में ही जलापूर्ति की गई पानी का पीएच मान टेस्ट कर शुद्ध जल आपूर्ति के दावे को सही बताने की कोशिश करते नजर आते हैं. उन्होंने बताया कि डैम से जलापूर्ति किए जाने वाले पानी का पीएच मान 6.5 से 8 के बीच में है, जो बिल्कुल सही है. ऐसे में सवाल यह है कि कांके डैम से शुद्ध जल आपूर्ति के दावों से बहता पानी घरों तक पहुंचते-पहुंचते दूषित कैसे हो जाता है ?  क्या शहर में बिछाई गई पाइप लाइन में ही बड़ी समस्या है, जिससे नाली का पानी भी बीच सफर में पाइप में प्रवेश कर जाता है ? या फिर डैम में
फिल्ट्रेशन की प्रक्रिया महज दिखावा है.
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