IMF के कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला बोले- मंडी व्यवस्था प्रासंगिक नहीं, APMC के लिए लड़ रहे अमीर किसान

कृषि कानून के विरोध में किसानों का प्रदर्शन जारी है. फाइल फोटो

CNN News18 के साथ बातचीत में IMF के कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला (Surjit Bhalla) ने कहा कि पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) के मुकाबले दूसरे राज्यों में उत्पादन क्षमता ज्यादा है.

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    नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला ने शनिवार को CNN News18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि कृषि कानून के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन से स्पष्ट है कि राजनीतिक विपक्ष खुलकर सामने आ गया है. पंजाब और हरियाणा के अमीर किसानों को लगता है कि उनके अनुचित अमीरी भरे दिन अब खत्म हो गए हैं. भल्ला ने दो टूक कहा कि मंडी व्यवस्था अब प्रासंगिक नहीं है और इससे नुकसान किसका है? क्या आपको टाइपराइटरों से शिकायत है.

    भल्ला ने कहा कि बहुत सारे अर्थशास्त्रियों ने सुधारों का समर्थन किया है. हो सकता है कि किसानों के प्रदर्शन का राजनीति से कोई कनेक्शन हो. उन्होंने कहा कि APMC (Agricultural produce market committee) व्यवस्था 150 साल पहले अस्तित्व में आई. एपीएमसी को मैनचेस्टर के कारखानों में कपास की सप्लाई के लिए स्थापित किया गया था ताकि किसानों को मजबूर किया जा सके कि वे रेगुलेटेड मार्केट के जरिए उपनिवेशी शासकों को अपने उत्पाद बेचें.

    उन्होंने कहा कि अमीर किसानों का समर्थन करना औपनिवेशिक नियम-कानूनों को बनाए रखना है. बावजूद इसके कि सभी पार्टियों ने एपीएमसी को जारी रखा, 1991 में इंडस्ट्री की बेड़ियां खोल दी गईं, लेकिन खेती आजाद नहीं हुई. नए सुधारों से किसानों को अपनी उपज मंडी के बाहर बेचने की आजादी मिलेगी.

    आंकड़ों का हवाला देते हुए भल्ला ने कहा कि सरकारी खरीद एपीएमसी मार्केट के जरिए होती है. फिर भी सिर्फ 6 फीसदी किसान ही एपीएमसी के जरिए अपनी फसलें बेच पाते हैं. इनमें से ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं. इन 6 फीसदी किसानों से 60 प्रतिशत गेहूं की खरीद होती है.

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    उन्होंने कहा कि अगर सभी किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, तो अमीर किसान सिर्फ एपीएमसी व्यवस्था को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. सबको कृषि कानून के ज्यादातर प्रावधान पता हैं, लेकिन अमीर किसान अपनी धनाढ्यता गंवाना नहीं चाहते, खासतौर पर जब ये अनुचित है.

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    भल्ला ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हरित क्रांति के जनक रहे हैं. दोनों राज्य अमीर राज्य हैं, लेकिन उत्पादकता के स्तर पर नीचे हैं. दूसरे राज्यों में उत्पादन पंजाब और हरियाणा के मुकाबले दोगुनी है.

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