ये हैं सुप्रीम कोर्ट के वो 5 जज, जिन्होंने LGBTQ को दिलाया उनका 'हक'

सेक्शन 377 पर फैसला सुनाने वाली बेंच में सीजेआई दीपक मिश्रा के अलावा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल रहे. आइए, जानते हैं कौन हैं ये जज और इन्होंने सेक्शन 377 पर क्या कहा?

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 12:00 AM IST
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के वो 5 जज, जिन्होंने LGBTQ को दिलाया उनका 'हक'
सुप्रीम कोर्ट
News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 12:00 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समलैंगिक सेक्स (गे सेक्स, होमो सेक्सुअलिटी) को नैचुरल मानते हुए इसे क्राइम की कैटेगरी से बाहर कर दिया है. कोर्ट ने संविधान के सेक्शन 377 को रद्द करते हुए साफ कहा है कि समलैंगिक सेक्स या संबंध कोई अपराध नहीं है.

सेक्शन 377 के ऐतिहासिक फैसले में क्या बोला SC?

सेक्शन 377 पर फैसला सुनाने वाली बेंच में सीजेआई दीपक मिश्रा के अलावा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल रहे. आइए, जानते हैं कौन हैं ये जज और इन्होंने सेक्शन 377 पर क्या कहा?

जस्टिस दीपक मिश्रा (CJI)

जस्टिस दीपक मिश्रा देश के 45वें प्रधान न्यायाधीश हैं. जस्टिस मिश्रा का कार्यकाल 2 अक्टूबर को पूरा हो रहा है. 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती है. ऐसे में जस्टिस मिश्रा एक दिन पहले यानी एक अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे. साल 1953 में जन्मे मिश्रा ने फरवरी 1977 में वकालत करनी शुरू की. वह 17 जनवरी 1996 को उड़ीसा हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज नियुक्त हुए. इसके बाद 1997 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया. जस्टिस मिश्रा को 2009 में पटना हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. 2010 में उनकी तैनाती दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में हुई. यहां से अक्टूबर 2011 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया.

जस्टिस दीपक मिश्रा (CJI)


इन मामलों पर फैसले को लेकर रहें चर्चा में
>>सीजेआई दीपक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में अहम मामलों की सुनवाई की है. उन्होंने मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेनन की फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज की.
>>उन्होंने दिल्ली गैंगरेप (निर्भया) के हत्यारों की फांसी की सजा बरकरार रखी.
>>अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले सीजेआई आधार, अयोध्या टाइटल सूट, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर अपना फैसला सुनाने वाले हैं.

समलैंगिकता अपराध नहीं, Section 377 बराबरी के अधिकार का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

सेक्शन 377 पर सीजेआई ने क्या कहा?
>>गे सेक्स पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा, 'समलैंगिकता के प्रति सभी को अपना नजरिया बदलना होगा. सबको समान रूप से देखना होगा. समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध बताना या मानना गलत है. समलैंगिकों के अधिकार भी दूसरे नागरिकों जैसे हैं. हमें एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और मानवता दिखानी चाहिए. खुद को अभिव्यक्त नहीं कर पाना मरने के समान है.'

जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन
जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन जाने-माने कानूनविद् फली एस नरीमन के बेटे हैं. सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए जाने से पहले नरीमन शीर्ष अदालत में सीनियर वकील के रूप में प्रैक्टिस करते थे. जस्टिस रोहिंटन को जुलाई 2011 में भारत का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया. जुलाई 2014 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए गए. बार से सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वाले नरीमन पांचवें जज हैं. जस्टिस नरीमन का कार्यकाल अगस्त 2021 तक है.

जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन


इन फैसलों में रहे शामिल
>>जस्टिस नरीमन ने सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 66ए को असंवैधानिक बताने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
>>जस्टिस नरीमन भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की विदेशी में संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा पेश करने का आदेश देने वाली बेंच का हिस्सा भी हिस्सा थे.

सेक्शन 377 पर क्या कहा?
>>सेक्शन 377 पर अपने अलग फैसले में जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने लिखा- 'बाई सेक्सुअल और होमो सेक्सुअल के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.'
>>जस्टिस नरीमन ने कहा, 'सरकार, मीडिया को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक प्रचार करना चाहिए, ताकि LGBTQ (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और क्वीयर) समुदाय को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े.'

भारत समलैंगिक संबंधों को अपराध नही मानने वाले 25 देशों में शामिल

जस्टिस एएम खानविलकर
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रह चुके हैं. साल 2000 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया. जस्टिस खानविलकर 2013 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे. जस्टिस खानविलकर को 2016 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

जस्टिस एएम खानविलकर


इस फैसले में रहे शामिल
>>जस्टिस एएम खानविलकर सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने रेप की शिकार 13 साल की बच्ची के पेट से भ्रूण निकालने का आदेश दिया. रेप की शिकार इस बच्ची के पेट में 24 हफ्ते का भ्रूण था.

सेक्शन 377 पर क्या कहा?
>>सेक्शन 377 पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस खानविलकर ने कहा, 'हमें दूसरे लोगों के व्यक्तित्व को स्वीकार करने की अपनी मानसकिता में परिवर्तन करना चाहिए. जैसे वे हैं, उन्हें वैसे ही स्वीकार करना चाहिए.'

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. जस्टिस चंद्रचूड़ 2013 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. जस्टिस चंद्रचूड़ बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस और महाराष्ट्र ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक भी रह चुके हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ भारत के एडिशनल अटॉर्नी जनरल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं.

इस फैसले में रहे शामिल
>>जस्टिस चंद्रचूड़ शीर्ष अदालत के उस नौ सदस्यीय बेंच का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया.

 सुप्रीम कोर्ट का फैसला, समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में नहीं

जस्टिस इंदु मल्होत्रा
जस्टिस इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की दूसरी कार्यरत महिला जज हैं. इसके अलावा वह सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील हैं. जस्टिस मल्होत्रा आजादी के बाद सुप्रीम कोर्ट की सातवीं महिला जज हैं. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकूर एवं कुरियन जोसेफ वाली कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल में इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया.


जस्टिस इंदु मल्होत्रा


सेक्शन 377 पर क्या कहा?
>>बेंच में शामिल जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा, 'LGBT समुदाय को बहुसंख्यकों द्वारा समलैंगिकता को पहचान न देने पर डर के साए में रहने को मजबूर किया गया. इसलिए इतिहास को उनसे माफी मांगनी चाहिए.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर