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सुप्रीम कोर्ट ने आप सांसद संजय सिंह को राहत के साथ दी सलाह, कहा- लिमिट क्रॉस करेंगे तो FIR होगी

आप सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली. (फाइल फोटो)
आप सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की उस याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2021, 3:02 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की उस याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण मामले में उनके खिलाफ दर्ज अनेक प्राथमिकियों को रद्द करने का अनुरोध किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण के मामलों में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप सांसद हैं. आपको इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए थे. आप लिमिट क्रॉस करेंगे तो कानून के मुताबिक आपके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले मामलों में सांसद संजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य सभा के सभापति से मंजूरी लेने से रोका नहीं जा रहा है.





क्या है मामला?
सांसद संजय सिंह ने 12 अगस्त, 2020 को लखनऊ में एक पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार एक विशेष जाति का पक्ष ले रही है. उसके बाद उनके खिलाफ हजरतगंज थाने पर भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.

विवेचना के बाद पुलिस ने सात सितंबर 2020 को सांसद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया और अभियोजन की स्‍वीकृति भी प्राप्‍त कर ली. इसके बाद एमपी/एमएलए अदालत ने चार दिसंबर, 2020 को आरोप पत्र पर संज्ञान लेकर सांसद संजय सिंह को सम्‍मन जारी कर दिया जिसको उन्‍होंने उच्‍च न्‍यायालय में चुनौती दी थी.

गैर जमानत वारंट जारी
एमपी-एमएलए अदालत ने 2 फरवरी को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्‍य संजय सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा के उपयोग के मामले में गैर ज़मानती वारंट जारी किया था. जस्टिस पीके राय ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 17 फरवरी तय की है.

सिंह के वकील ने सुनवाई के दौरान एमपी-एमएलए अदालत से अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकारी वकील के तर्कों के बाद न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि उन्हें आज तक जमानत नहीं मिली है.
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