मछुआरों की हत्या में आरोपी दो इतालवी नौसैनिकों पर चल रहे मुकदमे को बंद करने पर राजी सुप्रीम कोर्ट

दो इतालवी नौसैनिक मैसीमिलियानो लटोरे और सल्वातोर गिरोन की फाइल फोटो

दो इतालवी नौसैनिक मैसीमिलियानो लटोरे और सल्वातोर गिरोन की फाइल फोटो

दो इतालवी नौसैनिक मैसीमिलियानो लटोरे और सल्वातोर गिरोन पर 15 फरवरी 2012 को केरल के दो मछुआरों की हत्या करने के आरोप हैं.

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सुशील कुमार पांडेय


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2012 में केरल के मछुआरों (Kerala  fishermen) की हत्या मामले में आरोपी दो इतालवी नौसैनिकों पर भारत में चल रहे आपराधिक मुकदमे को बंद करने पर सहमत हो गया है. मंगलवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश पारित किया जाएगा. जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमा आर शाह की अवकाशकालीन बेंच को केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सूचित किया कि पीड़ितों को संवितरण के लिए शीर्ष अदालत में 10 करोड़ रुपये का मुआवजा जमा कर दिया गया है.

मेहता ने कहा कि कुल मुआवजे के बंटवारे पर फैसला करना केरल सरकार पर निर्भर है. इटली गणराज्य के वकील का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल की ओर से अवार्ड घोषित किए जाने के बाद दिल्ली की एक कोर्ट के समक्ष इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को भी बंद कर  दिया जाना चाहिए.
भारत सरकार और केरल सरकार ने ट्रिब्यूनल के अवार्ड को स्वीकार किया

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा था कि इटली, नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने का अधिकार सुरक्षित रखेगा. उन्होंने कहा कि भारत सरकार और केरल सरकार, दोनों ने ट्रिब्यूनल के अवार्ड को स्वीकार कर लिया है. वहीं केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पीड़ितों को उचित समय के बाद पैसा जारी किया जाना चाहिए. राज्य सरकार के वकील ने कहा, 'जब तक इस अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया था तब तक पीड़ितों के पास कुछ भी नहीं था. घटना के बाद राज्य में बहुत आक्रोश था. हालांकि वे अब संतुष्ट थे.'




जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि धन को केरल हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है और हाईकोर्ट पीड़ितों को दी जाने वाली राशि के वितरण के पहलू की निगरानी कर सकता है. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को आदेश पारित करेगा. दरअसल दो इतालवी नौसैनिक मैसीमिलियानो लटोरे और सल्वातोर गिरोन पर 15 फरवरी 2012 को केरल के दो मछुआरों की हत्या करने के आरोप हैं.

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