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फिर बंधी कोहिनूर वापस लाने की उम्मीद, SC याचिका पर सुनवाई के लिए हुआ तैयार

Bhasha
Updated: July 1, 2016, 10:39 AM IST
फिर बंधी कोहिनूर वापस लाने की उम्मीद, SC याचिका पर सुनवाई के लिए हुआ तैयार
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याचिका में कहा गया कि कोहिनूर हीरों का हीरा है और यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है. इसके साथ ही प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने का मूलभूत अधिकार है.

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  • Last Updated: July 1, 2016, 10:39 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करने को राजी हो गया, जिसमें केन्द्र सरकार को ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा वापस लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. इस याचिका को इसी प्रकार की लंबित एक अन्य जनहित याचिका की सुनवाई के साथ नत्थी कर दिया गया है.

प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि वह इस याचिका की इसी मुद्दे पर लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ सुनवाई करेगी.

यह नई याचिका पंजीकृत संस्था हैरिटेज बंगाल ने अपने वकील दानिश जुबेर खान के माध्यम से दायर की है. संस्था की तरफ से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील सौम्या चक्रवर्ती ने कहा कि केन्द्र से इस बेशकीमती हीरे को वापस लाने का प्रयास करने के लिए कहा जाना चाहिए.

जनहित याचिका में कहा गया, ''भारत को 1947 में आजादी मिली. लेकिन केन्द्र में आई एक के बाद एक सरकारों ने ब्रिटेन से कोहिनूर को भारत वापस लाने के लिए बहुत कम या बिल्कुल भी प्रयास नहीं किया जो उसका मूल स्थान है. लेकिन जब भी यह मुद्दा उठाया गया, केन्द्र सरकार ने संसद के पटल पर या आरटीआई अर्जी के जवाब में कहा कि कोहिनूर भारतीय कला का बेशकीमती नमूना है लेकिन उसे वापस पाने का दावा नहीं किया जा सकता क्योंकि यह 1972 के यूनेस्को समझौते के तहत नहीं आाता है.''

जनहित याचिका में कहा गया, ''बहरहाल, केन्द्र सरकार यह भी दावा करती है कि वह लंदन में अपने समकक्ष से सदा सम्पर्क में रहती है.'' याचिका में कहा गया कि कोहिनूर हीरों का हीरा है और यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है. इसके साथ ही प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने का मूलभूत अधिकार है.

इसमें कहा गया, ''सकारात्मक एवं सार्थक राजनयिक वार्ता के बारे में एक के बाद एक सरकारों का ढीला रवैया देश हित में नहीं था. केन्द्र सरकार को सक्रिय करने के याचिकाकर्ताओं एवं सही सोचने वाले अन्य लोगों के सभी प्रयास विफल हुए हैं.'' इस पूर्व की जनहित याचिका आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रन्ट ने दाखिल की है.

केन्द्र ने पूर्व में उच्चतम न्यायालय में कहा था कि कोहिनूर को ब्रिटेन न तो जबरदस्ती ले गया और न ही उसे ब्रिटिश शासकों ने चुराया था. इसे पंजाब के शासकों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को दिया था.
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शीर्ष अदालत ने तब पूछा था कि क्या सरकार कोहिनूर पर दावा करने को इच्छुक है जो दुनिया का सबसे बेशकीमती हीरा है. उस समय सॉलीसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा था कि संसद में कई बार कोहिनूर वापस लाने की मांग उठी है.

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First published: July 1, 2016, 10:39 AM IST
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