• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • जजों की कमी से जूझ रहे हैं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट, निचली अदालतों में रिक्त पदों का आंकड़ा 5 हजार पार

जजों की कमी से जूझ रहे हैं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट, निचली अदालतों में रिक्त पदों का आंकड़ा 5 हजार पार

सुप्रीम कोर्ट में भी न्यायाधीशों के पद खाली हैं. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में भी न्यायाधीशों के पद खाली हैं. (फाइल फोटो)

Shortage of Judges in India: कानून मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और 25 हाईकोर्ट्स (High Courts) में स्वीकृत जजों की संख्या में से 454 पद खाली हैं. इलाहबाद हाईकोर्ट में कुल जज 160 होने चाहिए. जबकि, इनकी मौजूदा संख्या 66 है.

  • Share this:
नई दिल्ली. कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने सदन को जानकारी दी कि देश की निचली अदालतों में 5000 से ज्यादा जजों की कमी है. जबकि, शीर्ष और उच्च न्यायालयों में यह आंकड़ा 454 का है. बुधवार को सामने आई संख्या से पता चलता है कि न्यायाधीशों की कमी से सबसे ज्यादा इलाहबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) प्रभावित है. इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) भी जजों की आधी क्षमता के साथ चल रहा है. बुधवार को सामने आए ये आंकड़े देश में धीमी न्याय व्यवस्था की गवाही देते हैं.

कानून मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और 25 हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या में से 454 पद खाली हैं. इलाहबाद हाईकोर्ट में कुल जज 160 होने चाहिए. जबकि, यहां खाली पदों की संख्या 66 है. 72 जजों की क्षमता वाले कलकत्ता हाईकोर्ट में केवल 31 जज हैं. जबकि, दिल्ली हाईकोर्ट 30 जजों के साथ आधी क्षमता से काम कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स की कुल 644 जजों की संख्या में से महिलाओं की हिस्सेदारी 77 है. सुप्रीम कोर्ट में 34 पदों में से 8 न्यायाधीशों की जगह रिक्त है.

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में केवल 66 नए जजों की नियुक्ति की गई है. जबकि, 2019 में यह आंकड़ा 81 और 2018 में 108 पर था. बीते साल कलकत्ता हाईकोर्ट में केवल एक जज शामिल हुए और इलाहबाद हाईकोर्ट में नियुक्ति की संख्या केवल चार रही. 53 जजों की स्वीकृत संख्या के बाद भी 34 पद दिल्ली हाईकोर्ट या पटना हाईकोर्ट में खाली हैं. दोनों अदालतों में कोई भी नई नियुक्ति नहीं हुई है. यही हाल मध्य प्रदेश में भी है. यहां 24 पद रिक्त हैं, लेकिन कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है. निचली न्याय व्यवस्था में आंकड़े बेहतर नजर आते हैं. यहां स्वीकृत 24 हजार 368 न्यायाधीशों में से रिक्त पदों की संख्या 5 हजार 132 है.

कानून मंत्री ने अपने जवाब में कहा, 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के मुताबिक, हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को पद रिक्त होने के 6 महीने पहले बार और संबंधित राज्य आयोग सेवा में से पात्र उम्मीदवारों में से दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ विचार कर प्रस्ताव की शुरुआत करने की जरूरत होती है. उच्च न्यायालयों में रिक्त पदों को भरना एग्जीक्यूटिव और ज्यूडिशियरी के बीच सतत, एकीकृत और सहयोगी प्रक्रिया है.'

उन्होंने जानकारी दी, 'इसमें राज्य और केंद्र स्तर पर कई संवैधानिक प्राधिकरणों से विचार और मंजूरी की जरूरत होती है. तय प्रक्रिया का पालन करते हुए जजों की नियुक्ति में तेजी लाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है.' उन्होंने कहा कि जिलों/अधीनस्थ न्यायपालिका में न्यायिक अधिकारियों के चुनाव और नियुक्ति में संविधान के तहत केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज