Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    नीलगिरी की पहाड़ियों में बने मिथुन चक्रवर्ती समेत कई हस्तियों के रिसॉर्ट्स तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

    रिसॉर्ट बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे मिथुन (तस्वीर- News18.com)
    रिसॉर्ट बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे मिथुन (तस्वीर- News18.com)

    तमिलनाडु स्थित नीलगिरी पहाड़ियों के मदुमलाई फॉरेस्ट रेंज में कई प्रभावशाली लोगों ने रिसॉर्ट बना लिए थे जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला दिया,

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 14, 2020, 1:58 PM IST
    • Share this:
    नई दिल्ली. तमिलनाडु (Tamil nadu) में बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती (mithun chakraborty) और कई अन्य जानी मानी हस्तियों के रिसॉर्ट तोड़े जाएंगे. ये रिसॉर्ट बहाथियों के सुरक्षित क्षेत्र में गैर कानूनी तरीके से बनाए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रिसॉर्ट तोड़ने के आदेश दिए.

    नीलगिरी पहाड़ियों के मदुमलाई फॉरेस्ट रेंज में कई प्रभावशाली लोगों ने रिसॉर्ट बना लिए थे. इनमें मिथुन चक्रवर्ती का भी एक रिसॉर्ट है. इस इलाके से मौसम बदलने पर हाथी बड़ी तादाद में गुजरते है. रिसॉर्ट बनाए जाने के बाद से वहां इंसानों को आबादी बढ़ने लगी है. इसका हाथियों के इस रास्ते से पलायन पर असर पड़ रहा है.

    मद्रास हाईकोर्ट ने 2011 में दिया था आदेश
    मद्रास हाई कोर्ट ने 2011 में ही रिसॉर्ट तोड़ने के आदेश दिए थे. लेकिन मिथुन चक्रवर्ती समेत कई लोगों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. तब से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ था. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी है.




    साल 2011 में हाईकोर्ट ने पर्यावरण को खतरे को देखते हुए कोर्ट ने मिथुन के रिसॉर्ट सहित इलाके के कुछ और होटलों को भी ढहाने के आदेश दिए थे. वहीं मिथुन ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कहा था कि उनके रिसॉर्ट से कई आदिवासियों को रोजगार मिलता है. साथ ही इस क्षेत्र में रिसॉर्ट होने और लोगों की आवाजाही की वजह से हाथियों के अवैध शिकार पर भी रोक लगी है. इसलिए उनके रिसॉर्ट को टूटने से बचाया जाए.

    मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इकोटूरिज्म के नाम पर बसाए गए मिथुन के होटल से पर्यावरण का नुकसान हो रहा है. ये बंगाल एलिफेंट कोरिडोर में पड़ता है और इस जमीन पर वन विभाग का अधिकार है.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज