महबूबा मुफ्ती को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? SC ने केंद्र ने पूछा

mehbooba mufti
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जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी मां की लोक सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी (हिरासत) को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 1:34 PM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की रिहाई की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी मां की लोक सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी (हिरासत) को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) प्रशासन से पूछा कि महबूबा को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अपने रुख की जानकारी देने के लिए कहा है. शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या उनकी हिरासत एक साल से आगे बढ़ाई जा सकती है. कोर्ट ने महबूबा की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की संशोधित याचिका पर केंद्र से एक हफ्ते में जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.

महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी याचिका में अपील की है कि उनकी मां महबूबा को पार्टी की बैठकों में शामिल होने की परमिशन दी जाए. इल्तिजा ने कहा कि उनकी मां एक राजनीतिक पार्टी की अध्यक्ष हैं. इसलिए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने करने दिया जाए. उन्हें अपने लोगों, पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मिलने-बातचीत करने की छूट दी जाए. हालांकि, कोर्ट ने इजाजत देने से इनकार कर दिया.

इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां की रिहाई के लिए दायर याचिका में कहा है कि उनकी मां महबूबा मुफ़्ती को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है. उन्हें फरवरी में इस कानून के तहत हिरासत में लिया गया था और वह अभी तक हिरासत में ही हैं.





बता दें कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के एक दिन पहले से कई अलगाववादी नेताओं के साथ नजरबंद कर लिया गया था.

इल्तिजा ने याचिका में अपील की है कि सर्वोच्च अदालत जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दे कि महबूबा मुफ्ती से उनके परिवार के लोगों और रिश्तेदारों को हफ्ते में पांच दिन मिलने का मौका दिया जाए. इसके अलावा उनके घर का लैंडलाइन फोन बहाल किया जाए. नई याचिका में कहा गया है कि बंदी बनाए जाने के लिए जारी डोजियर बेकार, असंवैधानिक और आधारहीन है.
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