बदले जा सकते हैं तीन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने की अनुशंसा

बदले जा सकते हैं तीन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने की अनुशंसा
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सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के कॉलेजियम ने मेघालय उच्च न्यायालय के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक को उड़ीसा हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की.

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  • Last Updated: April 19, 2020, 6:33 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश दीपांकर दत्ता को बंबई हाईकोर्ट  (Bombay High Court) का मुख्य न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता में कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विश्वनाथ समद्दर को मेघालय उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करने का भी शनिवार को फैसला किया. कॉलेजियम के फैसले को रविवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया.

सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के कॉलेजियम (Collegium)ने मेघालय उच्च न्यायालय (Meghalaya HC) के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक को उड़ीसा हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की.


इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई!
बता दें कि कोरोना प्रकोप के कारण सुप्रीम कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रहा है. लेकिन अब


मृत्युदंड के मामलों और परिवार कानूनों से संबंधित याचिकाओं को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है. हालांकि, अपनी वेबसाइट पर जारी एक नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि संबंधित पीठ की उपलब्धता और चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अनुमति पर यह निर्भर करेगा.

नोटिस में कहा गया, ‘इसका संज्ञान लेते हुए मृत्युदंड के मामले, और परिवार कानून से संबंधित मामलों को संबंधित पीठ की उपलब्धता और चीफ जस्टिस की पूर्व इजाजत के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है.’ नोटिस के अनुसार, ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए इच्छुक पक्ष ई-मेल के जरिए 24 अप्रैल तक जल्द से जल्द विवरण के साथ अपनी सहमति प्रदान करें.’

23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने कामकाज किया था सीमित
देशव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के मद्देनजर पूर्व में उच्चतम न्यायालय ने अत्यधिक जरूरी मामलों की सुनवाई के दौरान वादियों और वकीलों के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया था. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शीर्ष अदालत ने 23 मार्च से अपने कामकाज को सीमित कर दिया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभिन्न पीठों द्वारा केवल जरूरी मामलों की सुनवाई की जा रही है. परिपत्र में कहा गया था कि प्रधान न्यायाधीश लॉकडाउन के दौरान जरूरी समझे जाने वाले मामलों की सुनवाई के लिए पीठ गठित करेंगे.

(भाषा इनपुट के साथ)

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