अवमानना केस : वकील प्रशांत भूषण के इन दो ट्वीट्स पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, अब 5 अगस्त को होगी सुनवाई

अवमानना केस : वकील प्रशांत भूषण के इन दो ट्वीट्स पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, अब 5 अगस्त को होगी सुनवाई
प्रशांत भूषण पर साल 2009 में भी मामला दर्ज हुआ था. (Photo- PTI)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के दो ट्वीट को अवमानना करने वाला माना है . अब इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 22, 2020, 12:37 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में अधिवक्ता और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ बुधवार को स्वत: अवमानना के मामले की सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने पाया कि मामले में ट्विटर इंडिया नहीं बल्कि ट्विटर इंक ऑफ कैलिफॉर्निया सही प्रतिवादी है. ट्विटर को इस मामले में उपयुक्त आवेदन करने की अनुमति दी गई है.

शीर्ष अदालत ने ट्विटर इंडिया के खिलाफ भी अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की है. भूषण की कथित अपमानजनक टिप्पणियां ट्विटर हैंडल से ही प्रसारित हुई थीं. जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष यह मामला बुधवार को सुनवाई के लिए लिस्टेड था जिस पर सुनवाई हुई.

अदालत ने प्रशांत भूषण के जिन दो ट्वीट्स को अवमानना की श्रेणी में रखा है. एक में उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबड़े की बाइक वाली तस्वीर पर टिप्पणी की थी और दूसरे मेें उन्होंने चार पूर्व प्रमुख न्यायाधीशों की कार्यशैली पर सवाल उठाया था. अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 5 अगस्त को होगी.





सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को नोटिस दिया
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हमने अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया है. यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में कैलिफोर्निया की ट्विटर इंक सही प्रतिवादी है न कि ट्विटर इंडिया. ट्विटर को उचित आवेदन दर्ज करने की अनुमति दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक पक्ष की ओर से अवमानना कार्यवाही के लिए हमारे सामने एक याचिका लाई गई थी. हमने याचिका और सीजेआई एसए बोबडे के खिलाफ लगाए गए आरोप को पढ़ा.   27 जून को किया गया ट्वीट पर सवाल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने एडवोकेट प्रशांत भूषण और ट्विटर इंक को नोटिस दिया है.

साल 2009 में भी अवमानना की नोटिस का सामना कर चुके हैं प्रशांत
गौरतलब है कि प्रशांत भूषण न्यायपालिका से जुड़े मसले लगातार सवाल उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी. भूषण ने भीमा-कोरेगांव मामले में आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिये थे.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2009 में प्रशांत भूषण द्वारा एक पत्रिका को दिये गये साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ पूर्व और पीठासीन न्यायाधीशों के बारे में कथित रूप से आक्षेप किये जाने के मामले में उन्हें अवमानना का नोटिस दिया था.

यह मामला शीर्ष अदालत में अभी तक लंबित है और अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह प्रकरण अंतिम बार मई साल 2012 में सूचीबद्ध हुआ था. (भाषा इनपुट के साथ)
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