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SC Digital Hearing: सुनवाई के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर बैन लगा सकता है SC, दी लैपटॉप के इस्तेमाल की सलाह

SC Digital Hearing: सुनवाई के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर बैन लगा सकता है SC, दी लैपटॉप के इस्तेमाल की सलाह

शीर्ष अदालत ने दो जनवरी को देश में अचानक ही कोविड-19 के मामले बढ़ने का संज्ञान लेते हुए सात जनवरी से सारे मामलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करने का निर्णय लिया था. (फाइल फोटो)

शीर्ष अदालत ने दो जनवरी को देश में अचानक ही कोविड-19 के मामले बढ़ने का संज्ञान लेते हुए सात जनवरी से सारे मामलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करने का निर्णय लिया था. (फाइल फोटो)

SC Digital Hearing: प्रधान न्यायाधीश ने एक मामले में टिप्पणी की, 'वकील अपने मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पेश हो रहे हैं और दिखाई नहीं दे रहे हैं. हमें इस मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है. वकील साहब आप अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं और नियमित रूप से पेश हो रहे हैं. क्या आप बहस करने के लिए डेस्कटॉप (कंप्यूटर) नहीं रख सकते हैं?'

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    नई दिल्ली. मोबाइल फोन के उपयोग की वजह से डिजिटल सुनवाई के दौरान पैदा होने वाले व्यवधान पर प्रधान न्यायाधीश (CJI) एन वी रमण (NV Ramana) के सोमवार को अप्रसन्नता जाहिर किये जाने के कुछ घंटे बाद उच्चतम न्यायालय ने वकीलों और वादियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई में शामिल होने के लिए डेस्कटॉप कम्प्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल करने को कहा जिसके साथ मजबूत इंटरनेट कनेक्शन हो.

    शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘सभी अधिवक्ताओं और व्यक्तिगत रूप से पेश हो रहे वादियों से आग्रह किया जाता है कि मजबूत इंटरनेट के साथ किसी डेस्कटॉप या लैपटॉप द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत की सुनवाई में शामिल होने के लिए सिस्को वेबेक्स एप्लीकेशन से जुड़ें.’ अधिसूचना के अनुसार ऐसी कनेक्टिविटी होनी चाहिए कि न्यायाधीशों को किसी तरह का व्यवधान और असुविधा नहीं हो. इसमें वकीलों और वादियों को सलाह दी गयी है कि लैपटॉप या डेस्कटॉप, किसी एक उपकरण से डिजिटल सुनवाई से जुड़ें.

    इसमें कहा गया है, ‘सभी अधिवक्ताओं, व्यक्तिगत रूप से पेश हो रहे वादियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई में माइक्रोफोन लगे हैडसेट को तरजीह देनी चाहिए. सर्वश्रेष्ठ अनुभव के लिए कम्प्यूटर में बैकग्राउंड में चल रहे सभी ऐप को भी कृपया बंद कर दें.’

    यह अधिसूचना इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आज दिन में प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ इस बात से नाखुश थी कि सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं की तरफ से आवाज या दृश्यों अथवा दोनों में व्यवधान के कारण सोमवार को सूचीबद्ध 10 मामलों में सुनवाई स्थगित करनी पड़ी.

    प्रधान न्यायाधीश ने एक मामले में टिप्पणी की, ‘वकील अपने मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पेश हो रहे हैं और दिखाई नहीं दे रहे हैं. हमें इस मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है. वकील साहब आप अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं और नियमित रूप से पेश हो रहे हैं. क्या आप बहस करने के लिए डेस्कटॉप (कंप्यूटर) नहीं रख सकते हैं?’

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    एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील के दोषपूर्ण इंटरनेट कनेक्शन का संज्ञान लिया और कहा, ‘हमारे पास इस तरह मामलों को सुनने की कोई ऊर्जा नहीं है. कृपया एक ऐसी प्रणाली तैयार करें जिससे हम आपको सुन सकें. ऐसे ही दस मामले खत्म हो गए हैं और हम चिल्ला रहे हैं.’ शीर्ष अदालत मार्च 2020 से महामारी के कारण वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामलों की सुनवाई कर रही है और महामारी की बदलती स्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर शर्तों में ढिलाई या सख्त करती रही है.

    शीर्ष अदालत ने दो जनवरी को देश में अचानक ही कोविड-19 के मामले बढ़ने का संज्ञान लेते हुए सात जनवरी से सारे मामलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करने का निर्णय लिया था. ये पीठ इस समय न्यायाधीशों के आवासीय कार्यालयों में बैठ रही हैं.

    Tags: Coronavirus, Supreme Court, Video conference

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