SC ने राज्यों को सेक्स वर्कर्स को पहचान के सबूत के बिना ही सूखा राशन देने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से सेक्स वर्कर्स को बिना पहचान साबित किए सूखा राशन देने को कहा है (PTI फोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से सेक्स वर्कर्स को बिना पहचान साबित किए सूखा राशन देने को कहा है (PTI फोटो)

इस याचिका (Plea) में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) की वजह से यौनकर्मियों (Sex Workers) की स्थिति बहुत ही खराब हो गयी है. याचिका में देश में नौ लाख से भी ज्यादा यौनकर्मियों को राशन कार्ड (Ration Card) और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 29, 2020, 8:27 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (National AIDS Control Organisation) और विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा चिह्नित यौनकर्मियों (Marked sex workers) को पहचान का सबूत पेश करने के लिए बाध्य किये बगैर ही शुष्क राशन (Dry ration) उपलब्ध कराएं. शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही सभी राज्यों को चार सप्ताह के भीतर इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट (Compliance report) दाखिल करने का भी निर्देश दिया है. इन रिपोर्ट में यह विवरण होना चाहिए कि कितनी यौनकर्मियों (Sex Workers) को इस दौरान राशन (Ration) दिया गया.जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) की अवधि के दौरान यौनकर्मियों को वित्तीय सहायता (Financial Aid) दिये जाने के सवाल पर बाद में विचार किया जाएगा.

पीठ ने कहा कि राज्य यौनकर्मियों (Sex Workers) को शुष्क अनाज उपलब्ध कराएंगे और नाको तथा जिला और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State legal services authority) की सहायता से उनकी पहचान की जाएगी. शीर्ष अदालत (Supreme Court) गैर सरकारी संगठन दरबार महिला समन्वय समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका (Plea) में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) की वजह से यौनकर्मियों की स्थिति बहुत ही खराब हो गयी है. याचिका में देश में नौ लाख से भी ज्यादा यौनकर्मियों को राशन कार्ड (Ration Card) और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है.

यौनकर्मियों को किस तरह से राशन कार्ड और दूसरी सुविधाएं मुहैया हों, इस पर मांगी रिपोर्ट
पीठ ने सभी राज्यों से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा कि इन यौनकर्मियों को किस तरह से राशन कार्ड और दूसरी सुविधाएं मुहैया करायी जा सकती हैं. पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तथ्य को जानते हैं कि राज्य मदद के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन समस्या यह है कि यौनकर्मियों के पास कोई पहचान का सबूत नहीं है. इसलिए सभी को राशन दिया जाना चाहिए. राज्यों को हमें बताना चाहिए कि इस पर अमल कैसे किया जाए.'




केन्द्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि अगर राज्य यौनकर्मियों को सूखा अनाज देते हैं तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. शीर्ष अदालत ने पिछले सप्ताह यौनकर्मियों की समस्याओं का संज्ञान लेते हुए कहा था कि जनहित याचिका में उठाये गये मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.

महामारी की वजह से इनमें से 96 फीसदी अपनी आमदनी का जरिया खो चुकी हैं
गैर सरकारी संगठन का कहना है कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना में 1.2 लाख यौनकर्मियों के बीच किये गये सर्वे से पता चला कि महामारी की वजह से इनमें से 96 फीसदी अपनी आमदनी का जरिया खो चुकी हैं. याचिका में कहा गया है कि यौनकर्मियों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने का अधिकार है और उनकी समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

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याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी की वजह से यौनकर्मी सामाजिक लांछन के कारण अलग-थलग हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें सहयोग की आवश्यकता है.
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